पब्लिक सेक्टर की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया की ‘घर-वापसी’ हो सकती है। कंपनी के संस्थापक टाटा ग्रुप ने दूसरे दावेदार से ज्यादा बोली लगाई है। होड़ में स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय की कंसॉर्टियम भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की बिक्री को अंतिम मंजूरी हफ्तेभर में मिल सकती है। इसका जिम्मा गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई वाली वरिष्ठ मंत्रियों की समिति को दिया गया है।
इस हफ्ते हुई सचिवों की समिति की बैठक में रिजर्व प्राइस तय किया गया था। इसके 15,000 से 20,000 करोड़ रुपए के बीच होने की संभावना है। पता चला है कि टाटा ग्रुप की बोली रिजर्व प्राइस से ज्यादा और अजय सिंह की अगुवाई वाले कंसॉर्टियम से बहुत ज्यादा है। एअर इंडिया किसके हाथों में जाएगी, इस पर अंतिम फैसला के लिए हुई व्यवस्था के तहत मंत्रियों का समूह करेगा।
मंत्रियों की समिति की बैठक हफ्तेभर में कराने की कोशिश हो रही है और बिक्री की प्रक्रिया इसी महीने पूरी होने की उम्मीद की जा रही है। एअर इंडिया की बिक्री का फैसला करने वाली मंत्रियों की समिति में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हैं।
घाटे में चल रही एअर इंडिया को पिछले 20 साल में कई बार बेचने की कोशिश हुई, लेकिन निवेशकों के दिलचस्पी नहीं दिखाने सहित कई वजहों से सरकार को कामयाबी नहीं मिल पाई। लगभग 21 साल पहले तत्कालीन विनिवेश मंत्री अरुण शौरी को कंपनी में स्टेक बेचने का प्लान छोड़ना पड़ गया था। तब सिंगापुर एयरलाइंस ने टाटा ग्रुप के साथ मिलकर कंपनी में 40% स्टेक खरीदने के लिए बोली लगाई थी, लेकिन फिर अपने कदम पीछे खींच लिए थे।वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने शुक्रवार को मीडिया में आई उस खबर को गलत बताया जिसके मुताबिक बिड के विनर का नाम तय कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस पर फैसला जल्द किया जाएगा। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडेय ने ट्वीट में कहा, ‘एअर इंडिया के विनिवेश मामले में बोली को सरकार से मंजूरी मिलने वाली खबरें गलत हैं। सरकार जब भी फैसला लेगी, मीडिया को जानकारी दी जाएगी।’
एअर इंडिया के नए मालिक को घरेलू हवाईअड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 विदेशी लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट जबकि विदेशी एयरपोर्ट पर 900 स्लॉट मिलेंगे। गौरतलब है कि टाटा एयर सर्विस के नाम से चल रही कंपनी का 1953 में सरकारीकरण किया गया था। कंपनी की पहली फ्लाइट 15 अक्टूबर 1932 को जे आर डी टाटा कराची से मुंबई लेकर आए थे।