सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से बिल्डर और बायर में होने वाले करार के लिए मॉडल एग्रीमेंट बनाने का निर्देश दिया है। सरकार को यह नोटिस RERA एक्ट 2016 के तहत रियल्टी सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाते हुए मकान खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए दिया गया है।
इसको लेकर एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने एक याचिका दी थी। उसमें उन्होंने मकानों की खरीद-फरोख्त में जवाबदेही तय करने के लिए एजेंट और खरीदार के बीच मॉडल एग्रीमेंट बनाने की बात कही। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार हफ्ते बाद की तारीख रखी है।उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में गलत तरीके से करार किए जाने पर रोक लगेगी और सुरक्षित लेन-देन बढ़ेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकारें 1 मई 2017 की समय सीमा के भीतर RERA को लागू कराने में नाकाम रही हैं।
याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी वी नागरत्न की बेंच ने की। बेंच ने केंद्र को नोटिस तब जारी किया जब एक सीनियर एडवोकेट ने बताया कि केंद्र को RERA के सेक्शन 42ए के तहत इस मामले में नियम बनाने का अधिकार है।
एडवोकेट उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि किसी भी राज्य ने अपने यहां RERA लागू नहीं किया है। RERA एक्ट 2016 और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जरूरी मॉडल एजेंट-बायर एग्रीमेंट आज तक किसी राज्य में नहीं बनाया गया है।याचिका में कहा गया है कि मॉडल एग्रीमेंट से रियल एस्टेट में पारदर्शिता-निष्पक्षता आएगी। फर्जीवाड़े घटेंगे, ग्राहकों के अधिकारों और हितों की रक्षा होगी। बिल्डरों, प्रमोटरों और एजेंटों के कारोबार के मनमाने, पक्षपातपूर्ण और प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने वाले तरीके अपनाने पर रोक लगेगी।पिटीशन के मुताबिक, बिल्डर बार-बार डिलीवरी की नई तारीख देते रहते हैं और प्रतिस्पर्धा में रुकावट डालने वाले मानमाने कारोबारी तौर-तरीके अपनाते हैं। यह सब आपराधिक षडयंत्र, फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी, मकान की डिलीवरी में मनमानी करने, खरीदारों की इजाजत बिना उनके मकान का दुरुपयोग करने और कंपनी कानूनों का उल्लंघन करने जैसा है।
याचिका में केंद्र सरकार को मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट और मॉडल एजेंट-बायर एग्रीमेंट बनाने का निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है। उसके मुताबिक, एग्रीमेंट में लगे मनमाने क्लॉज के चलते रियल एस्टेट से जुड़े ज्यादातर मामलों में FIR दर्ज नहीं की जाती। ऐसे में रियल एस्टेट प्रॉपर्टी के खरीदारों को सुरक्षा देने के लिए आसान ढांचा बनाए जाने की जरूरत है।याचिका में देरी से डिलीवरी पर प्रमोटरों से खरीदारों को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था एग्रीमेंट में कराने के निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है। उसमें प्रमोटरों और मकान बेचने वालों से गबन की रकम की उगाही के लिए क्लॉज लगाए जाने की भी मांग की गई है।