पैंडोरा पेपर्स लीक से पाकिस्तान में खलबली:

पैंडोरा पेपर्स लीक ने पाकिस्तान की राजनीति में खलबली मचा दी है। इस लिस्ट में 700 पाकिस्तानियों के नाम हैं। इमरान खान सरकार के कई मंत्रियों के परिवार के सदस्यों का नाम भी इस लिस्ट में है। इनमें जल संसाधन मंत्री मूनिस इलाही, उद्योग मंत्री खुसरो बख्तियार, वित्त मंत्री शौकत तारिन और सांसद फैसल वावड़ा शामिल हैं। नेताओं के अलावा लिस्ट में सेना के अधिकारियों का नाम भी शामिल है।

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स के खुलासे के बाद पाकिस्तान के विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज ने पैंडोरा लीक के बाद सरकार से इस्तीफा मांगा है। पार्टी ने कहा कि इमरान खान का नाम भी पैंडोरा पेपर्स लीक में हो सकता है, इससे पहले तोशखाना केस में भी उनका नाम आया था, इसलिए इमरान को अपने पद से फौरन इस्तीफा दे देना चाहिए।

रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तानी PM इमरान खान ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि लिस्ट में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उनकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इमरान ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से इस मसले को जलवायु परिवर्तन की तरह गंभीरता से लेने की अपील की है।2016 में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने पनामा पेपर्स लीक किए थे। तब दुनिया को पता लगा था कि पनामा जैसे टैक्स हेवन्स देशों में अमीर लोग किस तरह अपनी काली कमाई इन्वेस्ट करते हैं। अब पनामा को ही लेकर पैंडोरा पेपर्स जांच के दस्तावेज सामने आने लगे हैं। इन्हें भी ICIJ ने तैयार किया है।

मध्य अमेरिकी देश पनामा को टैक्स हेवन्स कंट्रीज में गिना जाता है। यहां अमीर लोग पैसे देकर नागरिकता हासिल कर सकते हैं। इन्वेस्टमेंट के नियम और कानून बेहद आसान हैं। पनामा पेपर्स लीक में भारत समेत दुनिया के कई देशों के अमीरों के नाम सामने आए थे।पनामा सरकार को डर था कि पैंडोरा पेपर्स की वजह से दुनिया में उसकी छवि को गहरा धक्का पहुंच सकता है। यही वजह है कि उसने एक लीगल फर्म के जरिए ICIJ को पेपर जारी न करने के लिए ऑफिशियल लेटर जारी किया था। लेटर में कहा गया था कि दस्तावेजों के जारी होने से पनामा के बारे में गलत धारणा बनेगी।

यह विदेशी लीक की जांच और उससे जुड़ी लगभग 3.2 लाख विदेशी कंपनियों और ट्रस्टों के पीछे के लोगों का पता लगाने की कोशिश का हिस्सा थी। पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के डेटा सेंटर से जुटाई गई इन गोपनीय सूचनाओं की चर्चा ‘पनामा पेपर्स’ के रूप में हुई थी। मोसेक फोंसेका की 1.15 करोड़ से ज्यादा फाइलें का डेटा लीक हुआ था। तब 1977 से 2015 के अंत तक की जानकारी दी गई थी।

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