मधुमेह यानी डायबिटीज के रोगियों के लिए खुशखबरी है। फार्मा कंपनियां अब 12 दवाइयों की कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगी। नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने सोशल मीडिया पर इस तरह की जानकारी दी है।सोमवार को सोशल मीडिया पर NPPA ने कहा कि एंटी डायबिटीज की 12 दवाइयों की कीमतों पर सीमा लगा दी गई है। यानी तय सीमा से ज्यादा इनकी कीमतें नहीं हो सकती हैं। इन दवाइयों में ग्लिमप्राइड टैबलेट्स, ग्लूकोज इंजेक्शन और इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन सोल्यूशंस शामिल हैं। ड्रग प्राइस रेगुलेटर NPPA ने कहा कि हर भारतीय के लिए डायबिटीज की दवाइयां सस्ती होनी चाहिए। इसी वजह से कीमतों पर यह सीमा लगाई गई है।
NPPA के मुताबिक, ग्लिमप्राइड टैबलेट के 1 mg वाले एक टैबलेट की कीमत 3.6 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जबकि 2 mg के पावर वाले एक टैबलेट की कीमत 5.72 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसी तरह 1 ml वाले ग्लूकोज इंजेक्शन (25% मजबूती) की कीमत 17 पैसे होगी जबकि 1 ml इंसुलिन इंजेक्शन की कीमत 15.09 रुपए होगी।इसी तरह 1 ml के इंटरमीडिएट एक्टिंग सोल्यूशन इंसुलिन इंजेक्शन की कीमत 15.09 रुपए होगी। इसमें 1 ml के प्रीमिक्स इंसुलिन 30-70 इंजेक्शन की कीमत भी 15.09 रुपए ही होगी। NPPA ने कहा कि इन दवाइयों की कीमत की सीमा तय करने से लोग इसे ले पाएंगे। 500 mg वाले टैबलेट की कीमत 1.51 रुपए प्रति टैबलेट तय की गई है। जबकि 750 mg वाले टैबलेट की कीमत 3.05 रुपए तय की गई है। 1,000 mg वाले टैबलेट की कीमत 3.61 रुपए होगी।
मेटाफार्मिन कंट्रोल वाले टैबलेट के एक हजार mg पावर की कीमत 3.66 रुपए प्रति टैबलेट होगी। इसी टैबलेट के 750 mg वाले पावर की कीमत 2.4 रुपए प्रति टैबलेट कीमत होगी जबकि 500 mg वाले टैबलेट की कीमत 1.92 रुपए होगी।
करनाल स्थित भारती अस्पताल के जाने माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संजय कालरा बताते हैं कि भारत में इस समय डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फिलहाल देश में 7.7 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। वहीं कुछ राज्यों में तो यह सामान्य जीवन का हिस्सा बन चुकी है। आज यह बीमारी खांसी-जुकाम की तरह लोगों के साथ-साथ चल रही है। जबकि कोरोना ने इस बीमारी को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया है।