ISIS का ऐलान:आतंकी संगठन ने कहा- पाकिस्तान को बर्बाद करना हमारा पहला लक्ष्य

आतंकी संगठन ISIS खुरासन ग्रुप ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि पड़ोसी मुल्क को बर्बाद करना हमारा पहला लक्ष्य है। तालिबान के मुताबिक, आज अफगानिस्तान की बदहाल स्थिति के लिए पूरी तरह से पाकिस्तान जिम्मेदार है। यहां तालिबान के शासन के बाद भी इस्लामिक कानून लागू नहीं हो रहे हैं।

इसके साथ ही आतंकी संगठन ने उन देशों को भी ताकीद दी है जो इस्लाम या कुरान के खिलाफ जाएंगे। आतंकी संगठन ने सीधे शब्दों में कहा कि हमारा पहला लक्ष्य है शरिया कानून लागू करना। दुनिया में जो कोई भी इस्लाम और कुरान के खिलाफ जाएगा, वह हमारे निशाने पर होगा।

ISIS-K के प्रमुख आतंकी नजीफुल्ला ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर चेतावनी दी है। नजीफुल्ला ने कहा- हम शरिया कानून को लागू करना चाहते हैं। जिस तरह से हमारे पैगंबर जी रहे थे। उसी तरह लोगों को शरिया कानून मानना होगा। वे हिजाब लागू करना चाहते थे। हमारे पास लड़ने के लिए बहुत कुछ नहीं है, लेकिन मेरे हाथ में कुछ भी आता है, तो मैं पाकिस्तान से लड़ने जाऊंगा।के न्यूज ने IS के एक प्रमुख आतंकी नजीफुल्ला के हवाले से बताया कि हमारा पहला लक्ष्य पाकिस्तान को नष्ट करना है, क्योंकि आज अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए वही जिम्मेदार है। तालिबानी शासक कह रहे थे कि हम देश के 80% हिस्से को नियंत्रित करते हैं, लेकिन ढाई महीने गुजरने के बाद भी वे इस्लामिक शासन को लागू करने में कामयाब नहीं हो पाए। इसलिए हमने अफगानिस्तान में ISIS-K की शुरुआत की है।

ISIS-K ने हाल ही में दो शिया मस्जिदों पर फिदायीन हमला किया था। दोनों हमलों में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। तालिबानी ने इन हमलों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद आतंकी संगठन तालिबान के खिलाफ हो गया था।

तालिबान दुनिया के देशों को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि वह पहले जैसा कट्‌टर नहीं रहा। ISIS को ये बातें हजम नहीं हो रही हैं। आतंकी संगठन चाहता है कि किसी भी तरह से शरिया का सख्त कानून लागू किया जाए। हालांकि तालिबानी शासक इससे बचना चाहते हैं।

नजीफुल्ला ने तालिबान पर बड़ा आरोप लगाया है। उसका कहना है कि तालिबान के कुछ नेता कट्‌टर नेताओं को पर्दे में रख रहे हैं। शरिया के हिमायत और तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की 2013 में मौत हो गई। इस सच्चाई को दो साल तक गुप्त रखा गया था।

हमने तालिबान के बड़े नेताओं से मुल्ला उमर का वीडियो दिखाने को कहा, लेकिन वह भी नहीं दिखाया गया। इसके साथ ही वर्तमान में तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा को भी पर्दे में रखा जा रहा है। कुल मिलाकर तालिबान के कुछ नेता शक्तिशाली देशों के दबाव में शरिया कानून को लागू करने से बच रहे हैं।

24 वर्षीय नजीफुल्ला ने आगे कहा कि हमारी संख्या भले कम है, लेकिन ISIS-K के पास अफगानिस्तान पर कहर बरपाने की क्षमता है। अफगान सरजमीं पर तालिबान के गुर्गों की संख्या लगभग 70 हजार के आसपास है। वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसी के मुताबिक ISIS-K के आतंकवादियों की संख्या 2 हजार के करीब है। इसके बावजूद ISIS-K के आतंकी तालिबान पर भारी पड़ रहे हैं।

नजीफुल्ला ने खुलासा किया कि समूह में चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और रूस से आने वाले जिहादियों के अंतरराष्ट्रीय कैडर शामिल हो गए हैं। हालांकि, तालिबान अफगान धरती पर ISIS की मौजूदगी से इनकार करता रहा है।

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