घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारी इन दिनों दोहरी धमकियां झेल रहे हैं। इन लोगों ने घाटी में सरकारी नौकरी का जोखिम उठाया, लेकिन जब से आतंकियों ने बाहरी लोगों की टारगेट किलिंग शुरू की, इनमें से अधिकांश मूल ठिकानों पर लौट आए हैं। अधिकारी अब कर्मचारियों पर घाटी लौटकर नौकरी ज्वाइन करने का दबाव डाल रहे हैं। दूसरी ओर, इन लोगों को घाटी लौटने पर आतंकियों के हाथ मारे जाने का डर है।
आतंकियों ने इसी 7 अक्टूबर को महिला प्राचार्य और शिक्षक को स्कूल में घुसकर गोली मार दी थी। एक के बाद एक 10 से ज्यादा गैर-कश्मीरी कामगारों को निशाना बनाया गया। इससे घाटी में दहशत का माहौल बना और अल्पसंख्यक, खासकर कश्मीरी पंडित समुदाय के कर्मचारी जम्मू लौट आए। ये ऐसे लोग हैं जिन्हें सरकारी योजना और पैकेज के तहत घाटी में नौकरी के लिए राजी किया गया था।
वहां उन्हें सख्त सुरक्षा वाले शिविरों में रहने की सुविधा दी गई। अब शिविर कमोबेश खाली हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा पुख्ता करने के लिए कई कदम उठाए हैं, इसके बाावजूद ये प्रयास कश्मीरी पंडितों में भरोसा नहीं बढ़ा पा रहे हैं। इसलिए फिलहाल कोई लौटने को राजी नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक हालिया आतंकी घटनाओं के बाद जो गैर-कश्मीरी कर्मचारी लौटे उनमें से कुछ ही वापस आए हैं।
वापसी करने वालों में इंजीनियरिंग शाखाओं के लोग अधिक हैं। शिक्षक कोई भी नहीं लौटा है। अनंतनाग में पदस्थ एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- ‘हमारे ऊपर अधिकारियों का दबाव है। क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी लगातार फोन कर हमें ड्यूटी पर लौटने को कह रहे हैं। सरकार कह रही है कि शिविरों की सुरक्षा बढ़ाई है, लेकिन कार्यस्थलों पर सुरक्षा कैसे होगी?’ कुछ शिक्षकों ने बताया कि उन्हें आतंकी घाटी लौटने पर अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे हालात में हम वापस कैसे लौट सकते हैं?शिक्षकों का दावा है कि घाटी छोड़ने से पहले उन लोगों ने अफसरों से आग्रह किया था कि स्थिति सामान्य होने तक उन्हें छुट्टी पर माना जाए। इसके बावजूद नोटिस भेज रहे हैं। एक शिक्षक ने बताया, ‘हमें चेतावनी मिली है कि अगर ड्यूटी पर नहीं लौटे तो अगले महीने तनख्वाह रोक ली जाएगी।’
स्कूल शिक्षा विभाग के सामने एक और मुसीबत परीक्षाएं कराने की भी है। नौ नवंबर से स्टेट बोर्ड की 10वीं और 20 से 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इनके लिए विभाग के पास घाटी में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस पर कुछ कश्मीरी पंडित शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने पूरा पाठ्यक्रम अक्टूबर में खत्म कर दिया था। सिर्फ परीक्षाएं बाकी हैं।