पेटीएम IPO का पहला दिन:केवल 18% भरा IPO, रिटेल निवेशकों का हिस्सा 78% सब्सक्राइब

देश के सबसे बड़े IPO को लेकर रिटेल निवेशकों के बीच ज्यादा क्रेज दिख रहा है। पहले दिन में पेटीएम का IPO 18% भरा। लेकिन रिटेल निवेशकों का हिस्सा 78% सब्सक्राइब हो गया। हालांकि रिटेल के लिए केवल 10% हिस्सा ही रिजर्व है।पेटीएम ने कुल 4.38 करोड़ शेयर जारी किए हैं। इसके एवज में इसे 88.21 लाख शेयर्स के लिए एप्लिकेशन मिली हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की वेबसाइट के मुताबिक, 55.57 लाख शेयर्स के लिए कट ऑफ प्राइस पर आवेदन मिले हैं। कंपनी ने IPO का प्राइस 2,080 से 2,150 रुपए प्रति शेयर रखा है।

कंपनी 18,300 करोड़ रुपए में से 8,235 करोड़ रुपए एंकर निवेशकों से 3 नवंबर को जुटा चुकी है। हालांकि एंकर निवेशकों ने अपने हिस्से की तुलना में 10 गुना ज्यादा पैसा लगाया है। एंकर निवेशकों में बिड़ला म्यूचुअल फंड, ब्लैकरॉक, GIC और अन्य ब्लूचिप फंड शामिल थे।ब्लैकरॉक ने 1,045 करोड़ रुपए निवेश किया है जबकि कनाडा पेंशन फंड ने 938 करोड़ और GIC ने 533 करोड़ रुपए का निवेश किया है। 18,300 करोड़ रुपए के इश्यू में से कंपनी को करीबन 45% की रकम पहले ही मिल गई है। इसका वैल्यूएशन 1.48 लाख करोड़ रुपए का है।18,300 करोड़ रुपए में से 10 हजार करोड़ रुपए ऑफर फॉर सेल (OFS) से जुटाया जाएगा। यानी कंपनी में मौजूदा हिस्सेदार अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। पेटीएम लगातार घाटे वाली कंपनी रही है। कभी भी इसने फायदा नहीं कमाया है। पिछले साल इसका घाटा 1,700 करोड़ रुपए था। कंपनी ने सेबी को दी अर्जी में कहा है कि वह भ‌विष्य में फायदा कमाएगी, इसकी गारंटी नहीं दे सकती है।

रिटेल निवेशक इसमें कम से कम 12,900 रुपए का निवेश कर सकता है। यानी 6 शेयर्स के एक लॉट को आपको लेना होगा। ब्रोकरेज हाउस निर्मल बंग ने इस IPO को लंबे समय के लिए खरीदने की सलाह दी है। च्वाइस ब्रोकिंग ने भी इसी तरह की सलाह दी है। निवेशक लंबे समय के लिए इसे खरीद सकते हैं।अरिहंत कैपिटल ने कहा कि निवेशक लिस्टिंग पर फायदा कमाने के लिए इस IPO में पैसा लगा सकते हैं। के.आर. चौकसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निवेशक लिस्टिंग के समय फायदा कमाने के लिए इस IPO में पैसा लगा सकते हैं। इस ब्रोकरेज हाउस ने कहा कि यह कंपनी तीन फाइनेंशियल रेगुलेटर्स के दायरे में आती है। इसमें रिजर्व बैंक (RBI), बीमा रेगुलेटर (IRDAI) और सेबी शामिल हैं। एक भी रेगुलेटर की कोई भी कार्रवाई कंपनी के लिए घातक हो सकती है।

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