भारत की सुरक्षा के लिए चीन बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पहले पेंटागन की रिपोर्ट में भारत को चीन के प्रति सचेत रहने को कहा गया था, अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने चीन को भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। एक मीडिया कॉन्क्लेव में बोलते हुए जनरल रावत ने कहा कि हमारे जवान सीमा चीन को जवाब देने के लिए तैयार हैं। अगर अब गलवान जैसी घटना होती है तो चीन को माकूल जवाब दिया जाएगा।
CDS रावत ने कहा कि पिछले साल भारत और चीन के बीच 4 दशक की सबसे घातक हिंसक झड़प के बाद मोदी सरकार ने अपना फोकस पाकिस्तान से हटाकर चीन पर केंद्रित कर दिया है। भारतीय सेना आजादी के बाद से लेकर अब तक के सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। हमारी सेना को अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसी आधुनिक सेनाओं की तरह संचालित किया जाएगा।
जनरल रावत ने कहा कि परमाणु हथियार संपन्न दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में विश्वास की कमी और संदेह आड़े आ रहा है। पिछले महीने भारत और चीन के मिलिट्री कमांडर्स के बीच 13वें राउंड की बातचीत बिना नतीजे के खत्म हुई थी। दोनों पक्षों के बीच सीमा से पीछे हटने के मसले पर सहमति नहीं बन पाई है। इस कारण पिछले साल सीमा की सुरक्षा के लिए भेजे गए हजारों सैनिक अब बेस पर लंबे समय तक वापस नहीं लौटेंगे।
CDS जनरल रावत ने पूर्वी लद्दाख में चीन से सटी सीमा पर तनाव के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि LAC पर हालात सुधर सकते हैं, लेकिन पुरानी स्थिति बहाल होने में लंबा समय लगेगा। हमारी कोशिश है कि दोनों देश की सेनाएं अप्रैल 2020 के पहले की स्थिति में आ जाएं।
जनरल रावत के अनुसार, देपसांग और देमचोक सेक्टर में भारत और चीन की सेनाएं एक-दूसरे के काफी करीब हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीन के गांव बसाने की रिपोर्ट्स पर कहा कि जहां तक भारत की बात है, गांव का निर्माण हमारी सीमा के भीतर नहीं हुआ है।पिछले साल जून में LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों और 4 चीनी सैनिकों (चीनी आंकड़ों के मुताबिक) को जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद से चीन और भारत, दोनों ही बॉर्डर पर सैनिक, हथियार और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा रहे हैं।