CPEC का विरोध:चीन-PAK कॉरिडोर के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर इमरान खान सरकार की मुश्किलों मे फिर इजाफा हो गया है। कई महीनों से इस प्रोजेक्ट पर काम बंद है। इमरान सरकार चीन को मनाकर इसे शुरू कराना चाहती है, लेकिन काम शुरू होता इसके पहले ही विरोध शुरू हो गया है। बलूचिस्तान के ग्वादर में कई दिनों से CPEC के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। यहां के लोगों की मांग है कि CPEC पर कोई भी काम शुरू करने से पहले बुनियादी सुविधाएं दी जाएं। खास बात यह है कि सरकार ने अब तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है।न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूचिस्तान के ग्वादर में कई तबकों के लोग सरकार विरोधी रैलियों में शामिल हो रहे हैं। इनमें पॉलिटिकल पार्टीज, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स, मछुआरे और आम लोग शामिल हैं। इन्होंने कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। खास बात यह है कि ये सभी बुनियादी जरूरतों से संबंधित हैं। इनमें गैरजरूरी चेक पॉइंट्स हटाना, पीने का पानी और बिजली मुहैया कराना, मछली पकड़ने के बड़े ट्रॉलर हटाना और ईरान बॉर्डर खोलना शामिल है।

‘ग्वादर मूवमेंट’ के नेता मौलाना हिदायत उर रहमान सरकार विरोधी प्रदर्शनों की अगुआई कर रहे हैं। उन्होंने कहा- हमें लंबे वक्त से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस बारे में कोई भरोसा तक दिलाने को तैयार नहीं है। ग्वादर CPEC का सबसे अहम हिस्सा है। इससे अगर पूरे देश को फायदा मिलना है तो फिर हमें इसका फायदा क्यों नहीं मिल रहा है।ग्वादर के इलाके में चीन के बड़े-बड़े और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले ट्रॉले मछली पकड़ रहे हैं। स्थानीय मछुआरों की रोजी-रोजी इससे खतरे में पड़ गई है। चीन के ट्रॉलों में हथियारबंद गार्ड तैनात हैं, ये स्थानीय मछुआरों को मछली पकड़ने से रोक देते हैं। चीन की इस हरकत के खिलाफ लोकल फिशरमैन एकजुट हो गए हैं। इनका कहना है कि अगर चीन के ट्रॉलर्स पर रोक नहीं लगाई गई तो वे इन पर हमला कर देंगे। इमरान सरकार इस धमकी से डरी हुई है, क्योंकि कुछ महीनों पहले दासू डैम प्रोजेक्ट पर हमले में 9 चीनी इंजीनियर्स मारे गए थे।

चीन अब पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर की लोन देने को तैयार नहीं है। चीन को लगता है कि पाकिस्तान IMF और दूसरे देशों के कर्ज में इतना डूब चुका है कि वो इनके ब्याज की किश्तें भी कर्ज लेकर चुका रहा है। बीजिंग को डर है कि पाकिस्तान कभी CPEC के लोन को नहीं चुका पाएगा। यही वजह है कि उसने लोन रोक लिया है। 2018 में मेनलाइन रेलवे प्रोजेक्ट का बजट 9 अरब डॉलर तय किया गया था। 2020 में इसका दायरा कम किया गया और बजट 6.8 डॉलर हो गया। अब इस पर भी चीन ने रोक लगा दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *