नए वैरिएंट पर वैक्सीन कंपनियां एक्टिव:कोवीशील्ड डेवलप करने वाली एस्ट्राजेनेका ने स्टडी शुरू की

कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद से दुनिया भर की सरकारें तो अलर्ट हैं ही, वैक्सीन कंपनियां भी एक्टिव हो गई हैं। ब्रिटेन की एस्ट्राजेनेका ने शुक्रवार को कहा है कि वह दक्षिण अफ्रीका में मिले नए वैरिएंट ओमिक्रॉन पर अपनी वैक्सीन और एंटीबॉडी कॉकटेल के प्रभाव की जांच कर रही है। उम्मीद है कि कॉम्बिनेशन ड्रग इस वैरिएंट पर कारगर रहेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को इस मल्टीपल म्यूटेशन वाले वैरिएंट को B.1.1.1.529 (ओमिक्रॉन) नाम दिया था।

एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर में अपनी वैक्सीन के 2 अरब डोज सप्लाई किए हैं। भारत में यह वैक्सीन कोवीशील्ड नाम से मिल रही है। हालांकि, फरवरी में दक्षिण अफ्रीका इसकी वैक्सीन लगाने पर रोक लगा दी गई थी। ऐसा वैक्सीन के बीटा वैरिएंट से संक्रमित मरीजों पर कम असरदार होने की वजह से किया गया था। दक्षिण अफ्रीका में ज्यादातर मरीज इसी वैरिएंट से संक्रमित थे।

एस्ट्राजेनेका ने एक बयान में कहा कि किसी भी नए उभरते वैरिएंट की तरह, हम ओमिक्रॉन (B.1.1.1.529) की भी स्टडी कर रहे हैं, ताकि वैक्सीन पर पड़ने वाले असर को समझ सकें। इसका डेटा कलेक्ट करने के लिए बोत्सवाना और इस्वातिनी में रिसर्च की गई थी। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी वैक्सीन सार्स CoV-2 के सभी वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी दिखी है।

एस्ट्राजेनेका ने कहा कि उसने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ नए वैरिएंट पर जल्दी प्रतिक्रिया देने के लिए एक वैक्सीन प्लेटफॉर्म डेवलप किया है। एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर ही कोरोना वैक्सीन बनाई है। कंपनी ने पहले कहा था कि वह बीटा वैरिएंट से बेहतर ढंग से लड़ने में कारगर एक वैरिएंट वैक्सीन पर काम कर रही है।

कंपनी ने एक एंटीबॉडी कॉकटेल भी डेवलप की है। इसका इस्तेमाल कोरोना का संक्रमण रोकने और इलाज के लिए किया जा सकता है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ड्रग्स के असरदार होने में रुकावट डाल सकता है। एस्ट्राजेनेका की बनाई गई कॉम्बिनेशन ड्रग इसकी एफिकेसी बनाए रख सकती है।

हम इस नए वैरिएंट के खिलाफ लंबे समय तक असरदार एंटीबॉडी कॉम्बिनेशन का भी टेस्ट कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह अपनी एफिकेसी बनाए रखेगा, क्योंकि इसमें वायरस के खिलाफ काम करने वाली दो शक्तिशाली एंटीबॉडी शामिल हैं।एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन नए वैरिएंट पर कारगर रही तो इसका भारत को बहुत फायदा होगा। भारत में लगभग 80% डोज इसी वैक्सीन के लगे हैं। करोड़ों लोग दोनों डोज लगवा चुके हैं, यानी उनके अंदर एंटीबॉडी तैयार हो चुकी है। भारत में एस्ट्रोजेनेका की वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है।अमेरिकी फार्मा कंपनी मॉडर्ना ने शुक्रवार को कहा कि वह नए कोरोना के वैरिएंट ओमिक्रॉन के खिलाफ बूस्टर शॉट तैयार करेगी। मॉडर्ना ने कहा कि कंपनी नए खतरे से निपटने के लिए काम कर रही है और वह अपने मौजूदा टीके को नए वैरिएंट के हिसाब से ज्यादा असरदार बनाएगी। मॉडर्ना के CEO स्टीफन बैंसेल ने कहा कि नया वैरिएंट चिंता का कारण बना हुआ है। इसके खिलाफ हम अपनी रणनीति तैयार करने में लगे हुए हैं।

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