नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को आज यानी 25 दिसंबर को एरियन रॉकेट के जरिए फ्रेंच गुयाना स्थित लॉन्चिंग बेस से लॉन्च कर दिया गया है। इस टेलिस्कोप को नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कैनेडियन स्पेस एजेंसी ने तैयार किया है। इस पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च आया है। यह दुनिया का सबसे ताकतवर टेलिस्कोप है। इसकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अंतरिक्ष से धरती पर उड़ रही चिड़िया को भी आसानी से डिटेक्ट कर सकता है।
1990 में भेजे गए हबल टेलिस्कोप के मुकाबले यह 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली है। इसके जरिए ब्रह्मांड के शुरुआती काल में बने गैलेक्सी, उल्कापिंड और ग्रहों का भी पता लगाया जा सकता है। यह टेलिस्कोप ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के साथ ही एलियन की मौजूदगी का भी पता लगाएगा। इसके जरिए वैज्ञानिक ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने की कोशिश करेंगे।टेलिस्कोप के ऑप्टिक्स पर सोने की बारीक परत चढ़ाई गई है। यह परत इंफ्रारेड लाइट को डिफलेक्ट कर देगी, इससे टेलिस्कोप ठंडा बना रहेगा। कैमरों को सूरज की हीट से बचाने के लिए इसमें टेनिस कोर्ट के आकार की 5 लेयर वाली सनशील्ड लगाई गई है। टेलिस्कोप का व्यास 21 मीटर है।यह प्रोग्राम अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा इंटरनेशनल स्पेस साइंस प्रोजेक्ट है। इसका नाम नासा के दूसरे हेड ‘जेम्स वेब’ के नाम पर रखा गया है। नासा ने इस टेलिस्कोप में समय के साथ कई एडवांस टेक्नोलॉजी जोड़ी है। इससे ब्रह्मांड के कई रहस्य सामने आ सकते हैं।जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को हबल टेलिस्कोप का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह हबल टेलिस्कोप की जगह लेगा। नासा ने अप्रैल 1990 में अपने पहले अंतरिक्ष टेलिस्कोप हबल को अंतरिक्ष में स्थापित किया था। इस टेलिस्कोप की मदद से ही ब्रह्मांड की उम्र 13 से 14 अरब वर्ष के बीच आंकी गई थी। हालांकि 6 महीने पहले हबल स्पेस टेलिस्कोप ने अचानक काम करना बंद कर दिया था। अब जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप इसकी भरपाई करेगा।