छत्तीसगढ़ का वार्षिक बजट मार्च के दूसरे सप्ताह में आएगा। विधानसभा का बजट सत्र 7 मार्च से शुरू हो रहा है। 7 मार्च को ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए मतदान होगा। यह सत्र 25 मार्च तक चलना है। इसमें कामकाज के लिए 13 दिनों का समय तय किया है। विधानसभा सचिवालय ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सामान्य तौर पर फरवरी में शुरू होता है। कोरोना के बढ़े हुए मामलों और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नेताओं की व्यस्तता की वजह से इस बार इसे टाल दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा था, कोरोना के मामले कम हो जाने के बाद ही सत्र की बैठकें रखी जाएंगी। अब विधानसभा ने 7 मार्च से बजट सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह सत्र 25 मार्च तक प्रस्तावित है। इस दौरान 13 दिन कामकाज होगा। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। उसके बाद उनको धन्यवाद देने के प्रस्ताव पर चर्चा आदि होगी। सत्र के दूसरे अथवा तीसरे दिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 2022-23 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। उसके बाद बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी। बता दें कि सात चरणों में कराए जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान 7 मार्च को प्रस्तावित है। 10 मार्च को मतगणना और परिणामों की घोषणा की जानी है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उत्तर प्रदेश चुनाव में AICC की ओर से वरिष्ठ पर्यवेक्षक और रणनीतिकार हैं। कांग्रेस के करीब 22 विधायकों और पूर्व विधायकों को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भेजा जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी के नेतृत्व में 50 नेताओं-कार्यकर्ताओं की एक टीम पहले से ही उत्तर प्रदेश में संगठन को प्रशिक्षित कर रही है। भाजपा की ओर से भी कुछ विधायकों और सांसदों के उत्तर प्रदेश चुनाव में जाने की चर्चा है। राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी भी दी है।
पिछले कई बार से विधानसभा का बजट सत्र फरवरी में ही बुलाया जाता रहा है। मौजूदा सरकार में 2021 का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हुआ था। 2020 का बजट सत्र 25 फरवरी से 26 मार्च तक चला। दिसम्बर 2018 में कांग्रेस सरकार आने के बाद जनवरी 2019 में पहला सत्र आयोजित हुआ। बाद में 8 फरवरी से बजट सत्र की वास्तविक शुरुआत हुई। दोनों बैठकों को आधिकारिक रूप से एक ही सत्र कहा गया। यह सत्र एक मार्च तक चला। पिछली सरकार में भी कुछ अपवादों काे छोड़कर फरवरी.मार्च में ही सत्र बुलाए जाते रहे हैं।