कनाडा में कोविड वैक्सीन की अनिवार्यता व प्रतिबंधों के खिलाफ लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन को करीब 3 सप्ताह हो गए, लेकिन वहां अभी भी हालात जस के तस बने हुए हैं। करीब 22 दिन में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कनाडा सरकार इसे कुचलने की कोशिश में लगी हुई है। इसके लिए प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पहले आपातकाल लगाने की घोषणा की। बात नहीं बनी तो घोषणा के तीसरे दिन फिर ट्रक ड्राइवरों के फ्रीडम कॉन्वॉय को हटाने के लिए बख्तरबंद वाहनों और घुड़सवार जवान छोड़ दिए गए। उन्होंने 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।
कनाडा सरकार के इस कड़े रुख के बावजूद प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हैं। जब प्रदर्शनकारियों ने हटने से मना किया, तो दंगा रोधी पुलिस ने पैपर स्प्रे (मिर्च) और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद सड़क जाम करने वाली ट्रकों की कुछ कतारें हटा दी गईं। आंदोलन के तीसरे दिन पुलिस ने ट्रक ड्राइवरों के लीडर पैट किंग को हिरासत में ले लिया गया है। बता दें कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन रोकने के लिए 100 चौकियों का घेरा बनाया है, जहां से गुजरने वाले हर वाहन की चेकिंग चल रही है।
कनाडा में फैले इस उन्माद के लिए कई विशेषज्ञों की टीम ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंदोलन को अमेरिका के दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट और रूढ़िवादी नेताओं से आर्थिक मदद मिल रही है।उनके मुताबिक, अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में रूढ़िवादी राजनीति को सक्रिय करने के उद्देश्य से कनाडा में अस्थिरता लाने की कोशिश की जा रही है। इन विशेषज्ञों का कहना है रिपब्लिकन मानते हैं कि अगर वे प्रदर्शनकारियों की आर्थिक तौर पर मदद करने में साथ देते रहे तो अमेरिका में वोटर्स को लुभाने में सफल रहेंगे।
इधर, लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच क्यूबेक में तीन कॉलेज दिवालिया होने की वजह से बंद हो गए हैं। जिसके बाद वहां पढ़ाई कर रहे करीब 2 हजार भारतीय छात्रों के सामने गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि, तीनों ही कॉलेजों का मानना है कि कोरोना काल में उसे काफी नुकसान पहुंचा, जिसके कारण उन्हें कॉलेज बंद करना पड़ा। जो तीन कॉलेज बंद हुए हैं उनमें- मॉन्ट्रियल में एम कॉलेज, शेरब्रुक में सीडीई कॉलेज, और लॉन्ग्यूइल में सीसीएसक्यू कॉलेज शामिल हैं।
अब इस मामले में ओटावा के भारतीय उच्चायोग ने दखल दिया है। उच्चायोग ने कहा कि तीन संस्थानों में नामांकित भारत के कई छात्रों ने संपर्क किया है। इसके लिए भारतीय उच्चायोग ने एक एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें छात्रों से बिना जांच के किसी संस्थान को फीस ना देने की बात कही गई है। जारी किए गए एडवाइजरी में कहा गया है कि कनाडा सरकार उन तीनों कॉलेजों की जांच कराए और ये यह भी देखे कि उन कॉलेज को कनाडा की संघीय या या प्रांतीय सरकार द्वारा मान्यता दी गई है या नहीं।