यूक्रेन में धड़धड़ाते रूसी टैंकों से लोगों की धड़कनें तेज:रूसी बॉर्डर से सटे शहरों से भाग रहे लोग

यूक्रेन में धड़धड़ाते रूसी टैंकों से लोगों की धड़कनें तेज:रूसी बॉर्डर से सटे शहरों से भाग रहे लोग

रूस और यूक्रेन के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। इस बीच रूसी टैंकों के यूक्रेन में घुसने से लोगों की घबराहट और बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लगातार शेयर हो रहे वीडियो में खौफ का माहौल साफ दिख रहा है। बॉर्डर से सटे इलाकों से लोग यूक्रेन में अंदर की तरफ भाग रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने आज एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर फोकस किया जाएगा। रूस के रवैये से लोगों में ये भावना भी बढ़ रही है कि अब यूक्रेन को NATO से जुड़ ही जाना चाहिए।

यूक्रेन के लोगों की नजरें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भाषण पर गड़ी थीं और उनकी धड़कन भी तेज हो रहीं थीं। खौफ का ऐसा माहौल है कि लोग सो नहीं पा रहे हैं। एक तरफ रूस के टैंक और भारी सैन्य साजो सामान धड़धड़ाते हुए यूक्रेन की सीमा में घुस रहे हैं और दूसरी तरफ अब तक धैर्य रखे यूक्रेन के लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि आगे क्या होगा।

राजधानी कीव में मौजूद एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार बताते हैं, “घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला है। आम लोग अब परेशान नजर आ रहे हैं। सड़कें खाली हैं और लोगों की नजरें टीवी चैनलों पर टिकी हैं।

रूस ने यूक्रेन के दो अलगाववादी इलाकों लुहांस्क और डोनेट्स्क को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे दी है और अपनी सेनाओं को संसद की मंजूरी से ‘विदेशी धरती’ पर भेज दिया है। इन हालात में यूक्रेन के लोगों को लग रहा है कि यूक्रेन के पास अब NATO की तरफ जाने के अलावा कोई दूसरा व्यवहारिक विकल्प नहीं बचा है।

मंगलवार देर रात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने देश को संबोधित किया और कहा कि इस संकट में यूक्रेन के सभी राजनीतिक दल एक हैं और उनका रंग पीला और नीला है। जेलेंस्की आज यूक्रेन के शीर्ष 50 कारोबारियों के साथ बैठक करेंगे और तय करेंगे कि मौजूदा संकट से कैसे निपटा जाए। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कारोबारियों को मुश्किल हालात में टैक्स में छूट देने की घोषणा भी की है, ताकि इस संकट के कारण इकोनॉमी संकट पैदा न हो।

संकट के समय यूक्रेन के विपक्षी नेताओं ने सरकार के साथ एकजुटता दिखाई है। यूक्रेन के बड़े कारोबारी व विपक्षी नेतारिनात एखमेतोव ने अपना टैक्स एडवांस में ही जमा करा दिया है, ताकि इकोनॉमी को मदद मिले। बता दें कि एखमेतोव पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानूकोविच के समर्थक हैं।

यूक्रेन की पत्रकार नतालिया गुमेनयुक बता रही हैं कि तीन महीने पहले यूक्रेन की राजनीति गंदी थी, लेकिन अब सब एकजुट हैं। पूर्व में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों का विरोध करने वाले उद्योगपतियों ने भी अब यूक्रेन का समर्थन कर दिया है। हमेशा की तरह राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन को बांटना चाहा, लेकिन यूक्रेनी नागरिक अब मजबूती से एकजुट हो रहे हैं।”

दिसंबर में जब से यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ा, यूक्रेन की सरकार की तरफ से लोगों को यही कहा गया कि शांत रहें और अपना काम करते रहें। रूस के हमले की आशंका तो जाहिर की जा रही थी, लेकिन ये अंदाजा किसी को नहीं था कि घटनाक्रम इतनी तेजी से बदलेगा।

रूस समर्थित अलगाववादी लंबे समय से पूर्वी इलाकों को यूक्रेन से अलग करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन की इन इलाकों को अलग देश की मान्यता देने की घोषणा के बाद अलगाववादी जश्न मनाने लगे। उनका जश्न लंबा नहीं चला है, क्योंकि इस एरिया में हिंसा शुरू हो गई है।अलगाववादियों के कब्जे वाले इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। अलगाववादी जैमर तकनीक का इस्तेमाल कर रह हैं, जिससे संपर्क कट रहा है। रूस की सेना की मौजूदगी पर नजर रख रहे एक थिंक टैंक से जुड़ी मार्गो गोंटार के मुताबिक, “सोमवार को तथाकथित लुहांस्क डोनेट्स्क पीपुल्ज रिपब्लिक से सटे यूक्रेन के नियंत्रण वाले इलाकों में मोबाइल सेवाएं प्रभावित हुईं थीं। सेना के सूत्रों के मुताबिक, अब मोबाइल नेटवर्क बहाल हो गए हैं और डोनेट्स्क में इंटरनेट शुरू हो गया है।”

रूस के सैन्य बलों को लुहांस्क डोनेट्स्क पीपुल्ज रिपब्लिक में दाखिल होने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं। यूक्रेन में लोग इन्हें टेलीग्राम, टिकटॉक और दूसरे सोशल नेटवर्क पर शेयर कर रहे हैं और इससे डर का माहौल पैदा हो रहा है।

मार्गो गोंटार कहती हैं, “यूक्रेन के बाहर रह रहे लोग ये नहीं समझ पाएंगे कि इन तस्वीरों को देखना कितना डरावना है। रूस ने इसी तरह 2013 में क्रीमिया को यूक्रेन से छीन लिया था और फिर पूर्वी यूक्रेन में भीषण गृहयुद्ध छिड़ गया था।”

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