यूक्रेन से लौटे CG के स्टूडेंट का खुलासा:वहां की सेना ने भारतीय छात्रों को बनाया था ढाल

यूक्रेन से लौटे CG के स्टूडेंट का खुलासा:वहां की सेना ने भारतीय छात्रों को बनाया था ढाल

यूक्रेन से छत्तीसगढ़ लौटे छात्र ने बड़ा खुलासा किया है। उसका कहना है कि यूक्रेन की सेना इंडियन स्टूडेंट्स को अपनी ढाल बनाकर अपनी सुरक्षा के लिए रोक रहे थे। उन्हें पता था कि भारत और रूस के अच्छे संबंध हैं। ऐसे में यूक्रेन में भारतीय छात्रों के रहते रूस हमला नहीं कर सकता। यही वजह है कि यूक्रेनियन सैनिक स्टूडेंट्स को बार्डर जाने के लिए रोक रहे थे।बिलासपुर के शांतिनगर में रहने वाला छात्र अभिषेक भगत यूक्रेन के डेनिपर में मेडिकल का छात्र है। उसने बताया कि युद्ध के एक दिन पहले 23 फरवरी तक स्थिति सामान्य थी। बिल्कुल ऐसा नहीं लग रहा था कि रूसी सेना हमला करेगी। यूक्रेन में भी सभी लोग निश्चिंत थे। 24 फरवरी की सुबह अचानक हमला हुआ और बमबारी शुरू हुई। सायरन बजने लगा। रूस ने पूरे यूक्रेन में जगह-जगह गोले दागे।

अभिषेक ने बताया कि वॉर शुरू होने के बाद यूक्रेन की सेना का नया चेहरा देखने को मिला। पहले दो-तीन तक उन्हें बंकर में रहना पड़ रहा था। डेनिपर में युद्ध का ज्यादा असर नहीं था। इसके चलते चार-पांच घंटे ही बंकर में बिताना पड़ता था। जब वे वापस आने के लिए स्टेशन पहुंचे, तब यूक्रेन की सेना और लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। ट्रेन में बैठने नहीं दिया। हमारी आंखों के सामने स्टूडेंट्स रो रहे थे और पुलिस व सैनिक उनका सामान फेंक रहे थे और मारपीट कर रहे थे। अभिषेक के मुताबिक कई जगहों पर भारतीय व दूसरे देशों के छात्रों को सेना ने अपने कैंप के आसपास, स्कूलों दूसरी इमारतों में रोककर रखा था। वे छात्रों को मोबाइल पर अपनी लोकेशन शेयर करने दे रहे थे, बात करने दे रहे थे। छात्रों के बीच यह क्लीयर मैसेज था कि यूक्रेन की सेना अपने मूवमेंट को आसान करने के लिए, सेना को एकत्र करने के लिए ऐसा कर रही है, क्योंकि भारतीय व दूसरे देशों के छात्रों के कारण रशिया उन लोकेशन पर हमला नहीं करेगा। अभिषेक के मुताबिक अभी भी पिसोचिन सहित कई ऐसे स्थान हैं जहां छात्रों को कैंप के पास किसी इमारत में रखा गया है। भारतीय दबाव के कारण छात्रों को निकाला जा रहा है, नहीं तो यूक्रेनी सेना आसानी से हमें वहां से लौटने देने के लिए तैयार नहीं है।

अभिषेक ने बताया कि यूक्रेन मे सभी बोल रहे थे कि हमला नहीं होगा। यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाएगा। ऐसे में युद्ध टलने की बातें हो रही थीं। पर रूस ने अचानक हमला कर दिया। इसके बाद पूरे रूस में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। सभी इंडियन स्टूडेंट्स वापस आने के लिए परेशान होते रहे।अभिषेक का कहना है कि युद्ध के बाद आने वाले समय में यूक्रेन में इंडियन स्टूडेंट् को दिक्कतें हो सकती हैं, क्योंकि भारत और रूस के संबंध अच्छे हैं। ऐसे में भारत ने नाटो में यूक्रेन की तरफदारी नहीं की, तटस्थ रहा, इसका दुष्परिणाम यूक्रेन में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ सकता है। ऐसा संभव है कि जिस तरह से यूक्रेनियन का व्यवहार अभी बदला। वैसे भी आने वाले समय में इंडियन स्टूडेंट्स के साथ बदल सकता है।

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