श्रीलंका में भारत के हाईकमिश्नर गोपाल बागले ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर सख्त नाराजगी जाहिर की है, जिनमें कहा गया था कि श्रीलंका में तेजी से बिगड़ते हालात के बाद भारत वहां अपने सैनिक भेज सकता है। हाईकमिश्नर ने कहा- हम उन रिपोर्ट्स का पूरी तरह खंडन करते हैं, जिनमें कहा गया था कि भारत अपने सैनिक श्रीलंका भेज रहा है। हम इस तरह की गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग की निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि अफवाहें नहीं फैलाई जाएंगी।
श्रीलंका में गहराती आर्थिक समस्या के बीच राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को आपातकाल का ऐलान कर दिया। आदेश में कहा गया है कि देश की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के रखरखाव के लिए ये फैसला लिया गया है। इसके बाद पूरे देश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शनिवार को राजधानी कोलंबो में सेना की तैनाती के बीच दुकानें खोली गईं, ताकि लोग जरूरी सामान खरीद सकें।
इधर, फ्यूल क्राइसिस से जूझते श्रीलंका की मदद के लिए भारत ने जो ऑयल टैंकर भेजा था, वह शनिवार को श्रीलंका पहुंच गया है। शाम तक इससे फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद फ्यूल क्राइसिस से जूझते लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। दरअसल, भारत ने श्रीलंका को 1 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी है। इसी के तहत 40,000 टन डीजल ले जाने वाला एक जहाज श्रीलंका पहुंचा है।इमरजेंसी के ऐलान के बाद सेना संदिग्धों को बिना किसी मुकदमे के गिरफ्तार कर सकती है और लंबे समय तक हिरासत में रख सकती है। राजपक्षे की सरकार को समर्थन दे रही 11 पार्टियों ने कैबिनेट भंग कर अंतरिम सरकार के गठन की मांग की है। इनका कहना है कि हालिया कैबिनेट बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई है।देश में फ्यूल और गैस की कमी हो गई है। हालात पेट्रोल-डीजल के लिए लोगों को कई घंटों तक लाइन में लगाना पड़ रहा है। एजुकेशनल बोर्ड के पास कागज और स्याही खत्म हो गई है, जिसके बाद परीक्षा अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई हैं। श्रीलंका में गुरुवार की शाम डीजल नहीं था, जिससे ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप हो गया।