श्रीलंका में गहराए आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की सरकार ने संसद में बहुमत खो दिया है। मंगलवार को इमरजेंसी के बीच संसद की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान राजपक्षे परिवार के खिलाफ जनता के गुस्से को देखते हुए करीब 41 सांसदों ने गठबंधन से नाम वापस ले लिया। नए वित्त मंत्री अली साबरी ने नियुक्ति के 24 घंटे में ही इस्तीफा दे दिया।
मंगलवार शाम ही हजारों स्टूडेंट्स राजधानी कोलंबो में जुटे। इन्होंने भारी बारिश के बीच प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के घर तक मार्च निकाला। इस बीच, पूर्व क्रिकेटर्स भी सरकार के विरोध में खड़े हो गए हैं। तीन पूर्व कप्तानों सनथ जयसूर्या, रोशन महानामा और मार्वन अट्टापट्टू ने पोस्टर लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया।श्रीलंका में अब दवा की भारी कमी होने लगी है। इसके बाद देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाएं अब केवल इमरजेंसी केस को प्राथमिकता देंगी। माना जा रहा है कि अगर मौजूदा आर्थिक संकट जारी रहा, तो दवाओं की कमी बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच जाएगी।
इधर, सरकार से नाराज लोग हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। श्रीलंकाई पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को कानून नहीं तोड़ने की चेतावनी दी है। अब तक पुलिस ने 54 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर प्रदर्शनकारियों को पकड़ रही है।श्रीलंका के आर्थिक संकट को लेकर विपक्ष ने राष्ट्रपति गोटबाया का इस्तीफा मांगा है। इस पर गोटबाया राजपक्षे ने कहा कि वह श्रीलंका के राष्ट्रपति का पद नहीं छोड़ेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि वे संसद में 113 सीटों का बहुमत साबित करने वाली किसी भी पार्टी को सरकार सौंपने के लिए तैयार हैं।