कुछ साल पहले शुरू किए गए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश लेने पहले दिन से होड़ मच गई है। सरगुजा जिले के हर ब्लाॅक के इन स्कूलों में सीट से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। आवेदन की प्रक्रिया 5 अप्रैल से ही शुरू हुई है। सिर्फ अंबिकापुर के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पहली की 40 सीट के लिए 275 आवेदन आ चुके हैं। धौरपुर में 84 उम्मीदवारों ने पंजीयन कराया है। इन स्कूलों की व्यवस्था और अकादमी स्तर देखकर हर कोई अपने बच्चे को यहां प्रवेश दिलाना चाह रहा है। शासन ने पूरी पढ़ाई निशुल्क की है।
भास्कर ने अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के क्रेज का पता लगाने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की स्थिति की भी पड़ताल की। क्योंकि यहां भी शासन गरीब बच्चों को नर्सरी और पहली में निशुल्क प्रवेश दिलाता है। पड़ताल में यह बात सामने आई कि निजी स्कूलों में प्रवेश लेने कोई दिलचस्पी नहीं है। यहां 22 मार्च से प्रवेश के लिए पंजीयन शुरू हो गया है। 19 दिन बाद भी इन स्कूलों के लिए कुल 200 ही आवेदन आए हैं, जबकि आरटीई के तहत जिले के 97 निजी स्कूलों में 17 सौ से ज्यादा सीट रिजर्व हैं।
आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में 5 अप्रैल से प्रवेश के लिए पंजीयन शुरू हो गया है। पंजीयन के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों व्यवस्था है। उम्मीदवारों को पंजीयन के लिए 30 अप्रैल तक का समय है। इसी प्रकार आरटीई वाले निजी स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन से पंजीयन कराया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया 22 मार्च से शुरू हो गई और 15 मई अंतिम तिथि है।
निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश दिलाने हर साल कवायद की जाती है, लेकिन किसी भी वर्ष सीटों के बराबर प्रवेश नहीं हो पाता और न ही आवेदन ज्यादा आते हैं। पिछले साल 1864 सीट थी। इसके लिए 1925 आवेदन आए थे। जांच के बाद और 15 सौ के करीब एडमिशन हो पाए थे। बाकी के आवेदन निरस्त हो गए थे।गरीब वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाने के लिए आरटीई के तहत प्रावधान बनाए गए हैं। इसमें हर निजी स्कूल में नर्सरी या पहली में प्रवेश दिया जाता है। इस क्लास में कुल सीट की 25 प्रतिशत सीट आरटीई के तहत रिजर्व हैं। सरगुजा जिले में 97 निजी स्कूलों हैं जहां आरटीई की 1755 सीटें इस सत्र के लिए रिवर्ज हैं। फिर प्रवेश लेने कोई होड़ नहीं है, जैसा कि आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हैं।आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में बेहतर व्यवस्था देने कड़ी माॅनिटरिंग है। इसके लिए एक समिति का गठन कर दिया है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर अच्छे शिक्षक रखने कोशिश की जा रही है। प्रतिनियुक्ति पर आने वाले शिक्षकों के लिए मानदेय में भी कुछ लाभ दिया जा रहा है। इसी प्रकार संविदा शिक्षक भी रखने की व्यवस्था है। इससे समिति के माध्यम से अच्छे शिक्षक संविदा पर नियुक्त कर लिए जाते हैं। इसका पूरा खर्च शासन वहन कर रही है। इससे यहां बेहतर व्यवस्था है।