बाबा अमरनाथ की पहली तस्वीर:

बाबा अमरनाथ की पहली तस्वीर:

भूखे को अन्न और प्यासे को पानी की व्यवस्था कराने वाले बाबा बर्फानी अमरनाथ जी की यात्रा इस साल 30 जून से शुरू होगी। यात्रा के लिए 11 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। इस बीच इस साल की बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर सामने आई है। इसमें करीब आठ फीट ऊंचे बाबा बर्फानी के दर्शन हो गए हैं।

2019 जुलाई में अचानक केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा रोक दी थी। इसके कुछ दिन बाद पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने कश्मीर से धारा 370 खत्म कर दी थी। इसके बाद दो साल कोरोना के कारण अमरनाथ यात्रा पर रोक होने के कारण श्रद्धालुओं को बाबा बर्फानी के दर्शन नहीं हो पाए थे।

मार्ग पर सख्त पहरा, श्रद्धालुओं की ट्रैकिंग के लिए RFID सिस्टम

  • सरकार श्रद्धालुओं के लिए एक RFID प्रणाली शुरू करने की भी योजना बना रही है, जिससे हर श्रद्धालु की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।
  • जम्मू से लेकर घाटी में पूरे यात्रा रूट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। अर्धसैनिक बलों की 60 कंपनियां तैनात की जाएगी।
  • यात्रा मार्ग पर स्नाइपर डॉग तैनात होंगे। महिलाओं की दो कंपनियां भी रहेगी।
  • पर्वतीय बचाव दल को तैनात करने के अलावा, प्रशासन यात्रियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल के लिए शिविर भी लगाएगा।

क्या है अमरनाथ धाम और उसका महत्व?

अमरनाथ धाम जम्मू-कश्मीर में हिमालय की गोद में स्थित एक पवित्र गुफा है, जो हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।

  • माना जाता है कि अमरनाथ स्थित एक पवित्र गुफा में भगवान शिव एक बर्फ-लिंगम यानी बर्फ के शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। बर्फ से शिवलिंग बनने की वजह से इसे ‘बाबा बर्फानी’ भी कहते हैं।
  • पवित्र गुफा ग्लेशियरों, बर्फीले पहाड़ों से घिरी हुई है। गर्मियों के कुछ दिनों को छोड़कर यह गुफा साल के अधिकांश समय बर्फ से ढंकी रहती है। गर्मियों के उन्हीं दिनों में यह तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खुली रहती है।
  • खास बात ये है कि इस गुफा में हर वर्ष बर्फ का शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बनता है। बर्फ का शिवलिंग, गुफा की छत में एक दरार से पानी की बूंदों के टपकने से बनता है। बेहद ठंड की वजह से पानी जम जाता है और बर्फ के शिवलिंग का आकार ले लेता है।
  • यह दुनिया का एकमात्र शिवलिंग है, जो चंद्रमा की रोशनी के आधार पर बढ़ता और घटता है। यह शिवलिंग श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पूरा होता है और उसके बाद आने वाली अमावस्या तक आकार में काफी घट जाता है। ऐसा हर साल होता है।
  • इसी बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ की पवित्र गुफा की यात्रा करते हैं।
  • बर्फ के शिवलिंग के बाईं ओर दो छोटे बर्फ के शिवलिंग बनते हैं, उन्हें मां पार्वती और भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है।
  • पवित्र गुफा की लंबाई 19 मीटर, चौड़ाई 16 मीटर और ऊंचाई 11 मीटर है।

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