मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपनी मासिक रेडियो वार्ता “लोकवाणी’ में प्रदेश के बजट पर बात की। मुख्यमंत्री ने कहा, हमारी सरकार जनहित और राज्य के विकास के लिए चट्टान की तरह मजबूती से काम कर रही है। कोरोना संकट, जीएसटी और केन्द्रीय करों के हिस्से में कमी के बावजूद राजस्व आधिक्य का बजट प्रस्तुत किया गया है। राज्य का ऋण भार और वित्तीय घाटा लगातार कम हो रहा है। वहीं पूंजीगत व्यय लगातार बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, एक जमाना था जब दिल्ली की यूपीए सरकार द्वारा प्रदेश को केन्द्र से अधिक राशि दी जाती थी। तब भी हमारे प्रदेश में राजस्व आधिक्य का बजट नहीं बना था। अब की स्थिति में तो हमारे बजट में राज्य और केन्द्र की राशि लगभग बराबर है। इसके अलावा जीएसटी से संबंधित समस्या और भी अधिक गहरा रही है। इसके बावजूद हमने अपने राज्य की कुशलता के आधार पर आधिक्य का बजट बनाया है। हमारी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर छत्तीसगढ़ को जिस मुकाम पर पहुंचाया है, उस पर पूरे प्रदेशवासियों का सिर सम्मान और गौरव से ऊंचा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रस्तुत किया गया है। राज्य के बजट का आकार एक लाख 12 हजार 603 करोड़ 40 लाख रुपए है। हमारा नया बजट, नए छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा तय करने वाला है।कबीरधाम जिले के रणवीरपुर की आम्रपाली सहारे ने मुख्यमंत्री से बजट की प्राथमिकता जानना चाहा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारे प्रदेश में अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 45% है। हमारे बजट के कुल प्रावधान में 33%राशि अनुसूचित जनजाति के लिए और 12% राशि अनुसूचित जाति के लिए है। हमने 40% प्रावधान आर्थिक क्षेत्र के लिए रखा है तो इसके करीब ही 37% का प्रावधान सामाजिक क्षेत्र के लिए भी किया है।
राजनांदगांव मोहला के संजय जैन ने राज्य की ऋण स्थिति के संबंध में सवाल पूछा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया, 17 दिसम्बर 2018 की स्थिति में हमें 41 हजार 695 करोड़ का ऋण भार विरासत में मिला था। हमारी सरकार बनने के बाद शुद्ध ऋण में वृद्धि 42 हजार 528 करोड़ है। इसके पीछे एक बड़ा कारण है कि भारत सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति नहीं मिलने के कारण हमें जीएसटी ऋण लेने के लिए कहा गया। अगर हमें जीएसटी की राशि मिल जाती तो ऋण नहीं लेना पड़ता। इसमें वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में भारत सरकार से प्राप्त जीएसटी ऋण 8 हजार 74 करोड़ तथा विशेष केन्द्रीय सहायता ऋण 568 करोड़ सहित कुल 8 हजार 642 करोड़ शामिल है। इसे कम करने पर सरकार द्वारा लिया गया शुद्ध ऋण केवल 33 हजार 886 करोड़ है।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया, पिछले तीन वर्षों में केन्द्र सरकार से केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से की राशि में 13 हजार 89 करोड़ रुपए की कमी हुई है। कोविड-19 आपदा के कारण राज्य के राजस्व में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। यह भी एक बड़ा कारण है जिससे हमें यह ऋण लेना पड़ा। हमने वर्ष 2021-22 में 8 हजार 71 करोड़ का शुद्ध ऋण लिया। वर्ष 2022-23 के बजट में इसे और भी कम करते हुए शुद्ध ऋण 7 हजार 100 करोड़ किया गया है। इस प्रकार ऋण लेना लगातार कम किया जा रहा है। हमने जो भी ऋण लिया है, उसका लाभ किसानों तथा जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा है और लौटकर अर्थव्यस्था में आ रहा है।