ज्ञानवापी मामले में कल भी जारी रहेगी सुनवाई:हिंदू पक्ष की मांग- आदिविश्वेश्वर मंदिर परिसर का हिस्सा है ज्ञानवापी

ज्ञानवापी मामले में कल भी जारी रहेगी सुनवाई:हिंदू पक्ष की मांग- आदिविश्वेश्वर मंदिर परिसर का हिस्सा है ज्ञानवापी

वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में अब 11 मई को फिर से अदालत में सुनवाई होगी। मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच डेढ़ घंटे तक बहस हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने एडवोकेट कमिश्नर के बदले जाने और ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर दलील पेश की। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने तैयारी के साथ कुछ अन्य तथ्य प्रस्तुत करने के लिए बुधवार तक का समय मांगा। इस पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय कर दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर वह स्वयं मौके पर जाएंगे।

वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिवादियों की ओर से प्रार्थना पत्र के माध्यम से एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की मांग की गई है। वादी पक्ष की ओर से प्रार्थना पत्र के माध्यम से ज्ञानवापी परिसर में बैरिकेडिंग के अंदर और तहखाने के अंदर सर्वे करने की मांग की गई है। कोर्ट से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी आपत्ति देने के लिए कल का समय मांगा है। वादी पक्ष की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से एडवोकेट कमिश्नर को मौका मुआयना करने देने की अपील की गई है।

6 जुलाई 2022 को ही सुनने का आदेश दिया साध्वी पूर्णाम्बा और साध्वी शारदाम्बा ने सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कहा, ‘हमारा केस और वर्तमान में चल रहा वाद एक ही प्रकरण है। हमारी मांग है कि हमारे वाद और वर्तमान में चल रहे वाद पर एक साथ सुनवाई की जाए।’ दोनों साध्वियों के वाद पर कोर्ट ने पहले से ही 6 जुलाई 2022 की डेट सुनवाई के लिए तय किया है। आज भी कोर्ट ने दोनों साध्वियों के वाद को 6 जुलाई 2022 को ही सुनने का आदेश दिया है।

दोनों साध्वियों के अनुसार, वर्तमान में चल रहे वाद से मिलते जुलते और भी वाद कोर्ट में विचारधीन हैं, जिनकी सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए। इसमें वाद रंजना अग्निहोत्री बनाम उत्तर प्रदेश सरकार भी शामिल है।

एडवोकेट रमेश उपाध्याय ने कहा कि इसी प्रकार से अन्य और मुकदमे भी दाखिल हैं, जो ज्ञानवापी मस्जिद से ही संबंधित हैं। सभी वादियों ने कहा है कि ज्ञानवापी आदिविश्वेश्वर के मंदिर परिसर का हिस्सा है। पूर्व में यहां नंदी भगवान थे और यहां पूजा-पाठ होता था।

हमारी मांग है कि हमें पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। इसलिए साध्वी पूर्णाम्बा और साध्वी शारदाम्बा ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सभी मुकदमों की सुनवाई एक साथ करने की मांग की है। ताकि, जो भी फैसला हो, वह सभी के लिए एक साथ हो। इससे वादियों के साथ ही अदालत के समय की भी बचत होगी।

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