3 राज्यों में बाढ़ और बारिश:बिहार में बिजली गिरने से 33 की मौत; असम में बाढ़ से हालात बदतर

3 राज्यों में बाढ़ और बारिश:बिहार में बिजली गिरने से 33 की मौत; असम में बाढ़ से हालात बदतर

हीटवेव, बारिश, बाढ़ और बिजली देश के कुछ हिस्सों में कहर बरपा रही है। कुछ हिस्से जहां चिलचिलाती गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ जगह भारी बारिश से तबाह हैं। बिहार में शुक्रवार को आंधी तूफान और बिजली गिरने से 16 जिलों में 33 लोगों की मौत हो गई।

इस बीच, असम के चार जिलों- नागांव, होजई, कछार और दरांग में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब तक यहां बाढ़ और बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। करीब 500 लोग रेलवे ट्रैक पर रहने को मजबूर हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन के मुताबिक, राज्य के 29 जिलों में करीब 7.12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। जमुनामुख जिले के दो गांवों के 500 से ज्यादा परिवारों ने रेलवे ट्रैक पर अपना अस्थायी आशियाना बना रखा है। अकेले नागांव जिले में 3.36 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, जबकि कछार जिले में 1.66 लाख, होजई में 1.11 लाख और दरांग जिले में 52709 लोग प्रभावित हुए हैं।बिहार में शुक्रवार को आंधी तूफान और बिजली गिरने से 16 जिलों में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई। सीएम नीतीश कुमार ने घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया। राज्य मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार और रविवार को कुछ हिस्सों में आंधी तूफान के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसकी वजह है कि यहां प्री-मानसून गतिविधियां अब सक्रिय हो गई हैं।बारिश के कारण 23 घर क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। राजस्व मंत्री आर. अशोक ने बताया कि चिकमंगलूर, दक्षिण कन्नड़, उडुपी, शिवमोग्गा, दावणगेरे, हसन और उत्तर कन्नड़ जिले में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस बोम्मई ने बेंगलुरु के बारिश प्रभावित कई इलाकों का दौरा किया।कर्नाटक में जारी भारी बारिश के कारण राज्य के तटीय जिलों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने राज्य में दो और दिनों के लिए भारी बारिश का अनुमान जताया है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने उत्तर कन्नड़ जिले में भूस्खलन की चेतावनी दी है। बारिश के कारण 204 हेक्टेयर कृषि और 431 हेक्टेयर बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा। आने वाले दिनों में भी बारिश का अलर्ट होने के कारण खेतों में खड़ी फसलों को और नुकसान पहुंचने का खतरा है।

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