चारधाम यात्रा में एक महीने में 14 लाख श्रद्धालु पहुंचे:पैदल यात्रियों से पहली बार लगा जाम

चारधाम यात्रा में एक महीने में 14 लाख श्रद्धालु पहुंचे:पैदल यात्रियों से पहली बार लगा जाम

चारधाम यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं के पिछले सभी रिकॉर्ड टूटने जा रहे हैं। एक महीने में ही 14 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। 7 महीने चलने वाली इस यात्रा में 34 लाख श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड है, जो 2019 में बना था। उसके बाद कोरोना की वजह से दो साल तक सिर्फ सांकेतिक यात्रा हुई थी। यात्रा अक्टूबर तक चलती है।

पहली बार केदारनाथ धाम के रास्ते में पैदल चलने वाले यात्रियों का भी जाम लग रहा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा के रजिस्ट्रेशन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वहीं, कई लोगों को धामों पर ठहरने के लिए होटल या होमस्टे में बुकिंग नहीं मिल रही है।

प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर कहीं ठहरने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो यात्रा करने से बचना चाहिए। ताकि कोई परेशानी न उठानी पड़े। उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि इस बार यात्रियों का रिकॉर्ड टूटने की पूरी उम्मीद है।ऋषिकेश से चारों धामों के लिए रोज हजारों वाहनों में करीब 50 हजार यात्री रवाना हो रहे हैं। इससे उन हजारों चेहरों की मुस्कान लौट आई है, जो दो साल से बेरोजगार थे। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, यात्रा रूट पर 5 हजार से ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। इनमें ढाबे, होटल, होम स्टे, डिपार्टमेंटल स्टोर, मैकेनिक आदि थे। कुल 30 हजार लोगों को रोजगार मिलता है।

कोरोना के कारण दो साल में ये सब ठप था। कुछ परिवार पुश्तैनी गांव छोड़कर शहरों में मजदूरी करने चले गए थे। अब वे लौट आए हैं। देवप्रयाग से 20 किमी पहले कोड़ियाला में ढाबा चलाने वाली मृदला कुमारी बताती हैं, ‘कोरोना से पिता की मौत हो गई। दो साल से ढाबा बंद था। अब मैंने इसे शुरू कर दिया है। यात्रा पर आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या देखकर पांच लोगों का अतिरिक्त स्टाफ रखना पड़ा है।’

इसी तरह 4 साल पहले मुकेश नौटियाल ने कमेड़ा में 30 लाख का लोन लेकर रेस्त्रां खोला था। कोरोना से आमदनी शून्य हो गई। 12 लोगों का स्टाफ था, सभी की नौकरी चली गई थी। अब सभी लोगों को वापस बुला लिया गया है।

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