मई 2021 में NEET-PG की 1456 सीटें खाली रह गईं थी, जिन्हें अभी तक भरा नहीं गया है। इसे लेकर 7 डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज की थी, जिस पर बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि आप डॉक्टरों के भविष्य के साथ खेल रहे हैं।
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने (MCC) मेडिकल काउंसलिंग कमेटी और केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि मई 2021 से 1456 सीटें खाली हैं। अब तक मॉप-अप काउंसलिंग राउंड क्यों नहीं करवाया। खाली सीटें रखने से क्या मिल रहा है। ये जानते हुए भी कि डॉक्टरों की कितनी ज्यादा जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि हेल्थ सर्विस के डायरेक्टर जनरल को कोर्ट में तलब करके आदेश पारित करेंगे।
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि वह केंद्र से डॉक्टरों को उनके जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए मुआवजा देने का कहने पर भी विचार कर सकती है।बेंच ने शुरू में MCC की ओर से पेश वकील से कहा- अगर एक भी कोर्स की सीट खाली रह गई है, तो उसे खाली नहीं रहना चाहिए। यह देखना आपका कर्तव्य है कि वे खाली न रहें। आप छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।वकील ने जवाब में कहा कि आज यहां एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मौजूद नहीं हैं। सभी चीजों को समझाने के लिए एक एफिडेविट पैश किया जाएगा, जिसके लिए एक दिन का समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने एक दिन का समय देते हुए कहा कि मेडिकल के छात्रों के लिए ये एक गंभीर मामला है। केंद्र सरकार केवल एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के जरिए नहीं चलती।