NATO समिट में शामिल होंगे जेलेंस्की:पहली बार पैसेफिक रीजन के साझेदार भी साथ होंगे

NATO समिट में शामिल होंगे जेलेंस्की:पहली बार पैसेफिक रीजन के साझेदार भी साथ होंगे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इस महीने होने वाली नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) की बैठक में हिस्सा लेगें। NATO की उप महासचिव मिरसिया जोएन ने बताया कि 28-29 जून को होने वाले इस शिखर सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति को बुलाया गया है। NATO की बैठक स्पेन के मैड्रिड में होगी।

मिरसिया जोएन ने कहा- शिखर सम्मेलन में पहली बार पैसेफिक रीजन के NATO साझेदार- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल होंगे। बैठक में ओपन-डोर पॉलिसी और NATO के विस्तार को लेकर चर्चा होगी। हम यूक्रेन के हालातों को लेकर भी बात करेंगे। इस दौरान जेलेंस्की हमारे साथ होंगे। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही फिनलैंड और स्वीडन भी NATO में शामिल हों।जोएन ने बताया कि 15-16 जून को NATO के डिफेंस मिनिस्टर्स की बैठक होनी है। ये बैठक ब्रसेल्स में होगी। इसमें जॉर्जिया, फिनलैंड, स्वीडन और यूक्रेन के डिफेंस मिनिस्टर्स को भी बुलाया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता NATO महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग करेंगे।

हाल ही में फिनलैंड और स्वीडन ने NATO मेंबरशिप के लिए अप्लाई किया है। इससे रूस की दिक्कतें बढ़ गई हैं। NATO का विस्तार रूस के लिए संवेदनशील मुद्दा है। वह इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताता है। यूक्रेन पर हमले के लिए भी वह इसे बड़ी वजह बताता है। रूस की 1,300 किमी लंबी सीमा फिनलैंड से मिलती है। उसके लिए फिनलैंड एक बफर जोन है। रूस कतई नहीं चाहता कि NATO उसके इतने करीब आए। इसीलिए रूस, फिनलैंड के भी NATO में जाने का विरोध करता है।नाटो के मुताबिक, ओपन-डोर पॉलिसी के जरिए कोई भी यूरोपीयन स्टेट NATO सदस्यता के लिए आवेदन दे सकता है। इसके बाद NATO कलेक्टिव डिफेंस के अपने बुनियादी सिद्धांतों के मुताबिक, मुसीबत आने पर मेंबर देश की मदद करेगा। कलेक्टिव डिफेंस से मतलब है- एक या एक से ज्यादा सदस्यों पर हुआ हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने के मकसद से हमला कर दिया था। ये जंग अब भी जारी है। दोनों देशों को काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन कोई झुकने के लिए तैयारी नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के करीबी मायखाइलो पोडोल्याकी के मुताबिक जंग में हर दिन 100 से 200 यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो रही है।

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