छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसा राहुल अब सिर्फ 3 फीट दूर रह गया है। राहुल तक पहुंचने के लिए टनल बनाने का काम जारी है। बीच-बीच में चट्टान बाधा बन रही है। इसे देखते हुए बिलासपुर से मशीन मंगवाई गई है। हालांकि राहुल की सुरक्षा और मिट्टी धसकने के डर को देखते हुए काम की स्पीड कम है। इधर, एक बार फिर से रस्सी लेकर भी NDRF बच्चे को निकालने के प्रयास में है। बीच में खबर थी कि राहुल की हलचल कम हो गई है, लेकिन प्रशासन ने कहा है कि हम बच्चे को देख पा रहे हैं, वह सांस ले रहा है।
रेस्क्यू के मद्देनजर मेडिकल स्टाफ पूरी तैयारी के साथ अलर्ट मोड पर आ गया है। ऑक्सीजन, मास्क के साथ ही स्ट्रेचर की व्यवस्था की गई है। मेडिकल स्टाफ की कोशिश है कि जैसे ही राहुल को बाहर लाया जाए। वैसे ही उसका हेल्थ चेकअप किया जाए। हेल्थ चेकअप के बाद उसे तुरंत ही एंबुलेंस से बिलासपुर के अपोलो अस्पताल ले जाया जाएगा। इसके साथ ही ग्रीन कॉरोडिर बनाने की तैयारी की जा रही है।अब जबकि रेस्क्यू का काम जारी है। गड्ढे में पानी रिस रहा है। जिसे बाल्टी-बल्टी से निकाला जा रहा था। मगर वह ज्यादा देर तक संभव नहीं है। इसलिए कलेक्टर के निर्देश पर पिहरीद गांव में जल स्तर को कम किया जा रहा है। जिससे की उस गड्ढे में पानी का रिसाव नहीं हो। गांव के सभी बोर को चालू करा दिया गया। वहीं गांव के 2 स्टाप डैम है। जिसे बंद करा दिया गया है। टनल की खुदाई के दौरान काफी डस्ट निकल रहा है। पानी मारकर डस्ट को कंट्रोल किया जा रहा है। प्रशासन ने कहा है कि अब भी 3 से 4 घंटे का वक्त और लग सकता है।
पिहरीद गांव के बोरवेल में गिरे 10 साल का राहुल को करीब 75 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं। राहुल 60 फीट से भी नीचे गड्ढे में फंसा हुआ है। रविवार शाम तक रोबोटिक्स तरीका फेल हो जाने के बाद रात में टनल के सहारे बाहर निकालने का प्लान बनाया गया है। टनल की राह में एक बड़ी चट्टान आ गई है। ज्यादा बड़ी मशीन का उपयोग यहां करने से आसपास कम्पन की संभावना बढ़ जाएगी। इसलिए सूझबूझ और एक्सपर्ट के बीच चर्चा करके ही फैसला लिया जा रहा है।
रात के वक्त राहुल सो गया था। मूवमेंट नहीं होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बंद करना पड़ा। इस बीच सुबह करीब 5 बजे जब मूवमेंट हुआ तो उसे पीने के लिए फ्रूटी और खाने के लिए केले दिए गए।
