रूस और यूक्रेन जंग की आंच अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों के सख्त प्रतिबंध झेल रहे रूस ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) छोड़ने का मन बना लिया है। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस बात की पुष्टि की है। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस खुद का स्पेस स्टेशन डेवलप करने का प्लान कर रहा है।
रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के डायरेक्टर जनरल यूरी बोरिसोव के हवाले से बताया है कि रूस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से 2024 के बाद अलग हो जाएगा। बता दें कि यह स्पेस स्टेशन अमेरिका के सहयोग से चलाया जाता है। जिसमें रूस भी एक अहम साझेदार है। बोरिसोव को इसी साल जून में रोस्कोस्मोस का चीफ बनाया गया है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने ये कदम उठाया है। लेकिन रूसी अंतरिक्ष विश्लेषकों ने पहले ही कहा था कि रूस 2024 से आगे ISS में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए सहमत नहीं था। वहीं, अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदार चाहते हैं कि इसे 2030 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
इस साल जून से पहले रोस्कोस्मोस के डायरेक्टर जनरल रहे दिमित्री रोगोजिन ने यूक्रेन पर हमला करने के एक दिन बाद ही कहा था कि रूस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध रोस्कोस्मोस और नासा के बीच साझेदारी को खत्म कर देगा। इस साल अप्रैल में उन्होंने कहा था कि जब बिना किसी शर्त के प्रतिबंध हटेंगे तभी रूस ISS में साझेदारी पर आगे कोई फैसला लेगा।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) दुनिया का दूसरा सबसे महंगा प्रोजेक्ट है। 1998 में पहली बार इसे लॉन्च किया गया था। उस समय उम्मीद थी कि यह सिर्फ 15 सालों तक चलेगा। हालांकि इसका समय लगातार बढ़ाया जाता रहा। अभी के समय में इसके रखरखाव से जुड़ी समस्या बढ़ी है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ISS के कुछ मॉड्यूल पुराने हो रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में अमेरिका और रूस दो अहम साझेदार हैं। इसमें अमेरिका की जिम्मेदारी वहां जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को लाइफ सपोर्ट देना है, वहीं रूस का काम ये देखना है कि ISS पृथ्वी को घूमता रहे।