महाराष्ट्र के सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट की ओर से दाखिल 5 याचिकाओं पर दोनों पक्षों के वकीलों में गरमागरम बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे पक्ष के वकील से कहा- हमने 10 दिन के लिए सुनवाई टाली थी। आपने सरकार बना ली, स्पीकर बदल दिया। इस पर शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे ने कहा- उद्धव ठाकरे ने खुद ही CM पद से इस्तीफा दे दिया था। एक व्यक्ति या नेता पूरी पार्टी नहीं हो सकता है। CJI एनवी रमना ने कहा- हम कल (गुरुवार को) इस केस को सुबह साढ़े दस बजे सुनेंगे।सबसे पहले उद्धव कैंप के वकील कपिल सिब्बल ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- अगर 2 तिहाई विधायक शिवसेना से अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें किसी से विलय करना होगा या नई पार्टी बनानी होगी। वह नहीं कह सकते कि वह मूल पार्टी हैं। CJI ने पूछा कि मतलब आप कह रहे हैं कि उन्हें BJP में विलय करना चाहिए था या अलग पार्टी बनानी थी। सिब्बल बोले- कानूनन तो यही करना था।
सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। हलफनामे में कहा- महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार जहरीले पेड़ का फल है। इस जहरीले पेड़ के बीज बागी विधायकों ने बोए थे। शिंदे गुट के विधायकों ने संवैधानिक पाप किया है। शिंदे और बागी विधायक अशुद्ध हाथ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
सिब्बल बोले- जिस तरह से उन्होंने (शिंदे गुट) पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। वे मूल पार्टी होने का दावा नहीं कर सकते। 10वीं अनुसूची इसकी अनुमति नहीं देती है। पार्टी सिर्फ विधायकों का समूह नहीं होती है। इन लोगों को पार्टी की बैठक में बुलाया गया। वह नहीं आए। डिप्टी स्पीकर को चिट्ठी लिख दी। अपना व्हिप नियुक्त कर दिया। असल में उन्होंने पार्टी छोड़ी है। वह मूल पार्टी होने का दावा नहीं कर सकते। आज भी शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे हैं।
सिब्बल ने कहा- जब संविधान में 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी प्रावधान) को जोड़ा गया, तो उसका कुछ उद्देश्य था। अगर इस तरह के दुरुपयोग को अनुमति दी गई तो विधायकों का बहुमत सरकार को गिरा कर गलत तरीके से सत्ता पाता रहेगा और पार्टी पर भी दावा करेगा। पार्टी की सदस्यता छोड़ने वाले विधायक अयोग्य हैं। चुनाव आयोग जाकर पार्टी पर दावा कैसे कर सकते हैं?सोमवार को शिंदे गुट ने हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें कहा कि उद्धव गुट की याचिका को खारिज किया जाए। शिंदे गुट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में बहुमत खो दिया था। शिवसेना में लोकतांत्रिक तरीके से विभाजन हुआ, इसलिए कोर्ट इसमें हस्तक्षेप ना करे। शिंदे गुट ने कहा कि शिवसेना पर फैसला चुनाव आयोग को लेने दें। कोर्ट में यह तय नहीं होगा कि विभाजन सही है या नही?