छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में लगातार हो रही बारिश अब बड़ी मुसीबत बन गई है। रायपुर से लेकर रायगढ़ और जांजगीर-चांपा से लेकर बस्तर तक हालत बिगड़े हुए हैं। रायगढ़ और जांजगीर-चांपा में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। रायगढ़ के बाढ़ प्रभावित गांवों के स्कूलों में 16 से 18 अगस्त तक छुट्टी कर दी गई है। वहीं जांजगीर स्थित पामगढ़ में अस्पताल डूब गया है। इसके कारण भर्ती मरीजों के साथ ही उनके परिजनों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर बांधों का जल स्तर बढ़ने के कारण सोमवार को समोदा बांध से महानदी में एक लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। यह दोपहर 1 बजे तक रायगढ़ के सरिया बरमकेला क्षेत्र में पहुंच गया है। इसको देखते हुए इन इलाकों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है। लगातार पानी बढ़ने से महानदी के किनारे बसे गांव डूबने की कगार पर हैं। ऐसे में उन्हें खाली करा लिया गया है। लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है।
रायगढ़ में बाढ़ के हालात को देखते हुए कलेक्टर रानू साहू के निर्देश पर पुसौर और बरमकेला विकासखंड के बाढ़ प्रभावित गांवों के स्कूलों में 16, 17 और 18 अगस्त को छुट्टी कर दी गई है। हालांकि स्कूल के शिक्षक, रसोईया और सफाई कर्मी को बाढ़ राहत कैंप में सहयोग के लिए वहां मौजूद रहेंगे। वहीं कांकेर में भी कई गांव टापू बन गए हैं। सुकमा के कोंटा में NH-30 पांच दिन से बंद है।लगातार हो रही बारिश से धमतरी स्थित गंगरेल डैम लबालब भर गया है। बारिश के चलते करीब 1 लाख क्यूसेक से अधिक प्रति सेकंड पानी की आवक बनी हुई है। इसे देखते हुए उसके सभी 14 गेट सोमवार को खोल दिए गए थे। वहीं रुद्री बैराज से भी 131000 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते शिवरीनारायण सहित महानदी के किनारे के इलाकों में पानी बढ़ने लगा है। लोगों को वहां से बाहर निकालने के लिए मुनादी कराई गई। इसके साथ ही आसपास रहने वालों को वहां से राहत शिविर में पहुंचाया जा रहा है।महानदी का जल स्तर बढ़ने से शिवरीनारायण में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। इसे देखते हुए SDRF के गोताखोरों को तैनात करने के साथ ही राहत और बचाव के लिए बोट, नाव तैयार की गई है। जांजगीर में जिला स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम को भी अलर्ट किया गया है। चांपा, जाजंगीर, सक्ती, पामगढ़ और डभरा के एसडीएम, जनपद सीईओं, तहसीलदारों को बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। शिविरों में लोगों के रहने और भोजन का इंतजाम किया गया है। डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगाई गई है।