बिलासपुर में कर्मचारियों के साथ ही संविदा कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। इसके चलते स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मरीजों को भटकना पड़ा। वहीं, वैक्सीनेशन का काम भी ठप रहा। दूसरी तरफ अन्य विभागों के सरकारी दफ्तरों में भी सन्नाटा पसरा रहा और काम के लिए पहुंचे लोगों को भटकना पड़ा। हड़ताल के पांचवे दिन कर्मचारियों ने मशाल रैली निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया तो संविदा कर्मचारियों ने भी नियमितीकरण की मांग को लेकर तिरंगा रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में हल्ला बोला।
करीब पांच लाख कर्मचारी पिछले पांच दिन से DA और HRA की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। वहीं, शुक्रवार को प्रदेश के 1 लाख 80 हजार संविदा कर्मचारियों ने भी एक दिवसीय हड़ताल कर दिया। संविदा कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य केंद्रों में खासी परेशानी हुई। ग्रामीण क्षेत्र में उपस्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटकते रहे और मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। संविदा कर्मचारियों के आंदोलन के चलते शहर में 25 से अधिक वैक्सीनेशन सेंटर को बंद करना पड़ा। CMHO अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ही संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने की वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया दावा किया कि जिला अस्पताल, CIMS के साथ ही 20 सेंटरों में ही टीकाकरण हो सका। शनिवार से व्यवस्था ठीक हो जाएगी।इधर, कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने के कारण पिछले पांच दिन से तहसील ऑफिस, परिवहन ऑफिस, पंजीयन कार्यालय, जिला पंचायत सहित अन्य विभागों में कामकाज ठप है।
शहरी स्कूलों के टीचर आंदोलन कर रहे हैं, जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।कर्मचारी आंदोलन का असर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग में ज्यादा देखने को मिला। दरअसल, कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से संविदा कर्मचारियों के भरोसे स्वास्थ्य विभाग में काम चल रहा है। ऐसे में ज्यादातर उप स्वास्थ्य केंद्रों में संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भी संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। उनके हड़ताल पर जाने की वजह से कोरोना वैक्सीनेशन के साथ ही नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच सहित अन्य काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ।