छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के जिन 10 कॉलेजों को अंग्रेजी माध्यम बनाने का फैसला लिया है, उसमें बिलासपुर का एकमात्र साइंस कॉलेज भी शामिल है। संभाग ही नहीं प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस कॉलेज में एडमिशन के लिए मारामारी की स्थिति रहती है। ऐसे में एडमिशन होने के बाद इसे अंग्रेजी माध्यम बनाने का स्टूडेंट्स विरोध कर रहे हैं।
पहली से लेकर 12वीं तक हिंदी माध्यम में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज में अचानक से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई करने में दिक्कतें होंगी और उनके करियर पर सीधा असर पड़ेगा। यही वजह है कि कॉलेज को अंग्रेजी माध्यम बनाने का विरोध किया जा रहा है। इधर, कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि शासन ने स्टूडेंट्स और टीचिंग स्टाफ से भी सहमति मांगी है। उन्होंने शासन को पूरी जानकारी भेज दी है। आगे शासन के आदेश का इंतजार है।प्राचार्य SR कमलेश ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार प्रथम वर्ष के छात्रों को अंग्रेजी में पढ़ाई करनी होगी। परीक्षा भी अंग्रेजी में ही देनी होगी। जो छात्र अंग्रेजी में नहीं पढ़ सकते हैं, वे अपनी सहमति पत्र दे दें, उन्हें दूसरे शासकीय कॉलेजों में प्रवेश दिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कॉलेज में प्रथम वर्ष की 775 सीटों में प्रवेश हो चुका है। सभी सीटें फुल हो गई हैं।