मुख्यमंत्री ने रतलाम और रीवा की रीजनल न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का किया वर्चुअल शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने रतलाम और रीवा की रीजनल न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का किया वर्चुअल शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की न्याय व्यवस्था को सुगम, सर्व सुलभ और संशयमुक्त बनाने की दिशा में रीवा और रतलाम में आरंभ हो रही रीजनल न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाए महत्वपूर्ण कदम हैं। कुल 13 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से बनी इन प्रयोगशालाओं से रीवा, सतना, सिंगरौली, मैहर तथा रतलाम नीमच और मंदसौर क्षेत्रों में घटना स्थल पर ही टॉक्सिकोलॉजी, रसायन और जीव विज्ञान से संबंधित प्रकरणों का परिक्षण किया जा सकेगा। पुलिस, फॉरेंसिक साइंस और न्यायपालिका जस्टिस डिलेवरी सिस्टम के अभिन्न अंग हैं। यह तीनों अंग जितने ज्यादा सशक्त होंगे, उतना ही वहां के नागरिक सुरक्षित होंगे और आपराधिक गतिविधियां नियंत्रण में रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा और रतलाम में न्यायिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री जे एन कंसोटिया,डॉ राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में न्याय प्रणाली को जनकेंद्रित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में सघन गतिविधियां जारी हैं। लगभग 3 हजार से अधिक अनुपयोगी और अप्रचलित कानून निरस्त हुए हैं। नए कानूनों में ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग, फॉरेंसिक साक्ष्य की वीडियोग्राफी और पूछताछ में डिजीटल रिकार्ड को कानूनी आधार देने की व्यवस्था की गई है। कोर्ट के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स, वीडियो कांफ्रेंसिंग, मोबाइल ऐप, वर्चुअल सुनवाई आदि का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। प्रदेश में भोपाल, सागर, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना की जा चुकी है। यह सब प्रयास लोगों को सही सटीक और शीघ्र न्याय दिलाने में सहायक होंगे।

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