मुरैना सोलर परियोजना ने 2.70 रुपये प्रति यूनिट का ऐतिहासिक टैरिफ हासिल किया, मुख्यमंत्री ने इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का मार्ग बताया

मुरैना सोलर परियोजना ने 2.70 रुपये प्रति यूनिट का ऐतिहासिक टैरिफ हासिल किया, मुख्यमंत्री ने इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का मार्ग बताया

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मुरैना में विकसित हो रही प्रदेश की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है और मुरैना की यह परियोजना पूरे देश में ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के लिए एक नई राह खोलेगी।

इस परियोजना ने हाल ही में निविदा प्रक्रिया में 2.70 रुपये प्रति यूनिट की सबसे कम टैरिफ दर हासिल करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह देश की पहली ऐसी परियोजना है जो 3 रुपये प्रति यूनिट से कम पर ‘फर्म और डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी’ (FDRE) उपलब्ध कराएगी। मुरैना परियोजना की 95% वार्षिक उपलब्धता इसे भारत की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बनाती है जो इस उच्च मानक को पूरा करती है, जबकि देश की अन्य परियोजनाओं में यह उपलब्धता 85% तक ही होती है।

परियोजना की संरचना और क्षमता

इस परियोजना का क्रियान्वयन रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) द्वारा किया जा रहा है। इसमें दो इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जिनमें से प्रत्येक से 220 मेगावॉट क्षमता का उत्पादन होगा।

  • पहला चरण: दिन में सौर ऊर्जा का उत्पादन।
  • दूसरा चरण: शाम के व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) में बैटरी में जमा सौर ऊर्जा का उपयोग।
  • तीसरा चरण: रात में ग्रिड से चार्ज की गई बैटरी से सुबह के व्यस्त समय में बिजली की आपूर्ति।

यह अभिनव मॉडल बैटरी का दिन में दो बार उपयोग सुनिश्चित करेगा, जिससे लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस तरह सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में कुल 440 मेगावॉट की आपूर्ति होगी।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और निवेश का भरोसा

इस परियोजना की 25 साल के लिए 2.70 रुपये प्रति यूनिट की बोली लगभग 12 घंटे चली ई-रिवर्स नीलामी प्रक्रिया में तय हुई। इसमें अडानी, एनटीपीसी, रिन्यू सोलर सहित 16 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया, जो कि परियोजना की क्षमता से 10 गुना अधिक था। यह टैरिफ यह साबित करता है कि बैटरी भंडारण के साथ नवीकरणीय ऊर्जा अब कोयला आधारित बिजली से भी अधिक किफायती हो गई है।

RUMSL ने इस परियोजना को निविदा से पहले ही पूरी तरह से तैयार कर दिया था, जिसमें भूमि अधिग्रहण, पारेषण योजना और अनुबंध शामिल थे। इससे यह निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद मॉडल बन गया। परियोजना में एक मजबूत 3-स्तरीय भुगतान सुरक्षा तंत्र भी है, जिसमें राज्य की गारंटी शामिल है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने इस परियोजना को चंबल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना ऊर्जा संक्रमण में एक मील का पत्थर है और देश के स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को बल देगी।

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