मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन ग्रामीण विकास विभाग के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित प्रदेश का आधार ग्रामीण क्षेत्रों का विकास है। उन्होंने कलेक्टर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को निर्देश दिए कि अधोसंरचना निर्माण के साथ-साथ हितग्राहीमूलक योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
उन्होंने सुशासन और अंत्योदय के लक्ष्यों को सफल बनाने के लिए मूल मापदंडों के अनुसार कार्य करने पर जोर दिया, साथ ही स्वच्छता एवं पर्यावरण अभियानों में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा।
ग्रामीण विकास की प्राथमिकताएँ:
- पुनर्विकास पर ज़ोर: समृद्ध ग्रामों और विकास खंडों के पुनर्विकास के लिए समावेशी कार्ययोजना पर विशेष चर्चा की गई।
- राजस्व सुदृढ़ीकरण: पंचायतों के राजस्व सुदृढ़ीकरण पर भी चर्चा हुई।
- वृंदावन ग्राम योजना: अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के तहत जबलपुर, इंदौर, नीमच और पन्ना के 14 ग्रामों का चयन किया गया है।
- समयबद्ध प्रगति: कलेक्टर्स को मैदानी अमले का दायित्व निर्धारण करने को कहा गया ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं में समयबद्ध प्रगति हो सके।
- लखपति दीदी अभियान: इस अभियान को और सशक्त बनाने की अपेक्षा की गई। सिंगरौली, टीकमगढ़ और देवास जिलों को योजना में सबसे बेहतर कार्य के लिए सराहा गया।
- समीक्षा: जल गंगा संवर्धन अभियान और ग्रामीण विकास के संदर्भ में विजन डॉक्यूमेंट 2047 के एक्शन प्वाइंट्स पर चर्चा और समीक्षा की गई।
उत्कृष्ट नवाचारों का प्रस्तुतिकरण:
- खंडवा: आत्मनिर्भर गौ-शाला और जल संवर्धन अभियान
- रायसेन: जल गंगा संवर्धन अभियान
- छिंदवाड़ा: वाश ऑन व्हील
- बड़वानी: एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) पट्टा होल्डर संबंधी कार्य
- सीधी: बेलहा डैम पुनर्जीवन