मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की: किसानों को असुविधा न हो, डीबीटी से भुगतान सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की: किसानों को असुविधा न हो, डीबीटी से भुगतान सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर भावांतर योजना के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की सोयाबीन खरीदी के लिए लागू भावांतर योजना का सर्वत्र स्वागत हो रहा है और इसमें 9.36 लाख से अधिक, यानी तीन गुना से ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया है।

मुख्य निर्देश:

  • असुविधा मुक्त प्रक्रिया: मुख्यमंत्री ने सुनिश्चित करने को कहा कि योजना की पूरी प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
  • भुगतान व्यवस्था: ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत किसानों के बैंक खाते में भावांतर राशि का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से किया जाए। भुगतान की सूचना किसान को एसएमएस द्वारा दी जाए।
  • मंडी प्रबंधन: जिलों में मंडियों और उपमंडियों में सोयाबीन विक्रय के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी की जाएं तथा किसानों को योजना की सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाए।

योजना की प्रगति:

  • पंजीयन रिकॉर्ड: योजना के प्रभावी प्रचार से पंजीकरण में बड़ी वृद्धि हुई है। उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा और सागर जैसे सात जिलों में 50,000 से अधिक पंजीयन दर्ज किए गए हैं, जबकि 21 जिलों में यह संख्या 10,000 से अधिक है।
  • विक्रय अवधि: सोयाबीन विक्रय की अवधि 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक निर्धारित है।
  • तकनीकी तैयारी: सभी मंडियों में ई-उपार्जन और ई-मंडी पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक कार्य हो रहा है। तकनीकी और मानव संसाधन व्यवस्थाएं पूरी हैं, जिनमें सीसीटीवी मॉनिटरिंग, हेल्प डेस्क और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शामिल है।

सोलर पंप योजना पर विचार-विमर्श: इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक अन्य बैठक में प्रदेश के किसानों के लिए सोलर पंप योजना की प्रगति पर भी अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की।

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