रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 24 अक्टूबर 2025 को जैसलमेर में सेना कमांडरों के सम्मेलन के दौरान देश की सुरक्षा स्थिति और भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का गहन जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने राजस्थान के अग्रिम क्षेत्रों तनोट और लोंगेवाला का भी दौरा किया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का महत्व:
- राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के सैन्य कौशल और राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक बताया।
- उन्होंने कहा कि सैनिकों की शक्ति केवल हथियारों में नहीं, बल्कि उनके नैतिक अनुशासन और रणनीतिक स्पष्टता में निहित है।
- रक्षा मंत्री ने ज़ोर दिया कि भारत अपनी शर्तों पर किसी भी आतंकवादी गतिविधि का जवाब देगा, जो ‘नए भारत का रक्षा सिद्धांत’ है।
- उन्होंने सैनिकों को विरोधियों को कभी कम न आंकने और हमेशा सतर्क रहने का आह्वान किया।
अन्य मुख्य बातें:
- सम्मेलन में ग्रे ज़ोन युद्ध, संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार के रोडमैप जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
- रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद शांति और विकास सुनिश्चित करने में सेना की भूमिका की सराहना की।
- उन्होंने उत्तरी सीमा पर चल रही बातचीत और तत्परता की नीति को संतुलित और दृढ़ बताया।
- लोंगेवाला में, राजनाथ सिंह ने युद्ध स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और 1971 के युद्ध के नायकों को सम्मानित किया, जिसमें ‘चांदपुरी हॉल’ का उद्घाटन भी शामिल है।
- तकनीक-आधारित युद्धों पर बल देते हुए, उन्होंने सैनिकों की मानवीय भावना और दृढ़ इच्छाशक्ति को सबसे बड़ी संपत्ति बताया।
- इस अवसर पर कई तकनीकी पहलें (जैसे एज डेटा सेंटर, सैनिक यात्री मित्र ऐप) और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (नमन केंद्र) शुरू की गईं।