मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी रामानन्दाचार्य जी को केवल एक दार्शनिक ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक क्रांति का अग्रदूत करार दिया। उज्जैन में जुटे श्रद्धालुओं और संतों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी जी निर्गुण और सगुण भक्ति के बीच एक मजबूत सेतु थे। उनकी शिक्षाएं आज के आधुनिक समाज को भी समानता और करुणा का मार्ग दिखाती हैं।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय को सनातन के पुनरुत्थान का काल बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम विराजमान हैं और उज्जैन का महाकाल महालोक पूरे देश की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने जोर दिया कि स्वामी जी ने यह सिखाया कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म और ईश्वर के प्रति उसकी भक्ति से होती है।