नई दिल्ली: भारत को एक पेंशन-आधारित समाज में बदलने की दिशा में केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) के कार्यकाल को 2030-31 तक बढ़ाकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कैबिनेट के इस निर्णय का उद्देश्य देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों को बुढ़ापे में एक सम्मानजनक और सुरक्षित आय प्रदान करना है।
प्रमुख प्रभाव और आवश्यकता: योजना के विस्तार की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई ताकि योजना में आने वाली व्यवहार्यता संबंधी कमियों (Viability gaps) को दूर किया जा सके। सरकार द्वारा दी जाने वाली निरंतर सहायता से यह सुनिश्चित होगा कि निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी सतत सामाजिक सुरक्षा मिलती रहे।
प्रगति की समीक्षा: आंकड़ों के अनुसार, अब तक 8.66 करोड़ लोग इस योजना का हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक इस विस्तार से वित्तीय समावेशन का दायरा और बढ़ेगा, जिससे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी सरकारी सुरक्षा चक्र का लाभ मिल सकेगा।
- निर्णय: पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक विस्तार दिया।
- वित्तीय सहायता: प्रचार गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों और फंड की स्थिरता के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई गई।
- मुख्य लक्ष्य: असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को वृद्धावस्था में 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की निश्चित पेंशन देना।
- वर्तमान स्थिति: 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से अधिक नामांकन दर्ज।
- दृष्टिकोण: यह कदम भारत के ‘विकसित भारत@2047’ लक्ष्य के तहत सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा।