दावोस: विश्व आर्थिक मंच (WEF) में “एआई पावर प्ले, नो रेफरीज” सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत एआई विकसित करने वाले देशों के अग्रणी समूह में शामिल है। उन्होंने एआई को एक ‘पांचवीं औद्योगिक क्रांति’ करार देते हुए कहा कि भारत केवल एआई का उपयोग ही नहीं करेगा, बल्कि इसके पांचों प्रमुख स्तरों—एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा—पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
एआई का भारतीय ढांचा और रणनीति: मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की एआई रणनीति चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- साझा कंप्यूटिंग केंद्र: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से एक विशाल कंप्यूटिंग सुविधा का निर्माण।
- एआई मॉडल संग्रह: व्यावहारिक जरूरतों के लिए मुफ्त एआई मॉडल्स का एक व्यापक संग्रह उपलब्ध कराना।
- स्किलिंग: 1 करोड़ (10 मिलियन) लोगों को एआई के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना।
- उत्पादकता: घरेलू और वैश्विक उद्यमों के लिए भारतीय आईटी उद्योग को एआई-संचालित समाधानों की ओर ले जाना।
जीपीयू और लागत: श्री वैष्णव ने बताया कि भारत ने 38,000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया है। सरकार द्वारा समर्थित और सब्सिडी वाली यह सुविधा छात्रों और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के मुकाबले केवल एक-तिहाई दाम पर उपलब्ध होगी।