भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच वर्ज़न 4.0) को अब तीन नए खंडों में कुल 472.3 रूट किलोमीटर पर शुरू कर दिया गया है। यह एक ही दिन में कवच की अब तक की सबसे बड़ी कमीशनिंग है।

कवच 4.0 की विशेषताएं और उपलब्धि:
- कवच 4.0 तकनीक: यह अत्याधुनिक माइक्रोप्रोसेसर, GPS और रेडियो संचार पर आधारित है। यह सिस्टम ‘सिग्नल जंप’ (SPAD) को रोकता है और एक ही ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है।
- नया कीर्तिमान: इससे पहले एक महीने में सबसे बड़ी कमीशनिंग 324 किमी (कोटा-मथुरा) की थी, जिसका रिकॉर्ड आज 472.3 किमी के साथ टूट गया है।
- कुल नेटवर्क: इस विस्तार के साथ अब रेलवे के पांच ज़ोन में कुल 1,306.3 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 सक्रिय हो चुका है।
भारतीय रेलवे ने अपने तीन महत्वपूर्ण और उच्च-घनत्व वाले कॉरिडोर पर कवच प्रणाली को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। यह कदम यात्रियों के विश्वास और परिचालन विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

किन रूटों पर शुरू हुआ कवच 4.0?
- पश्चिम रेलवे (वडोदरा-विरार): 344 किमी लंबे इस खंड पर कार्य पूरा हुआ। ‘सयाजीनगरी एक्सप्रेस’ मुंबई से चलने वाली पहली कवच-युक्त ट्रेन बनी।
- उत्तर रेलवे (तुगलकाबाद-पलवल): 35 किमी के इस व्यस्त उपनगरीय खंड पर चार लाइनों को कवच के दायरे में लाया गया है।
- पूर्व मध्य रेलवे (मानपुर-सरमतनार): 93.3 किमी लंबे इस खंड पर ‘सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस’ पहली कवच सेवा बनी। परीक्षण के दौरान आमने-सामने की टक्कर की स्थिति में ट्रेन अपने आप रुक गई, जो सिस्टम की सफलता को प्रमाणित करता है।
प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के तहत विकसित ‘कवच’ न केवल हादसों को रोकने में सक्षम है, बल्कि यह ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी सहायक है। रेलवे इसे ‘मिशन रफ्तार’ के साथ जोड़कर देख रहा है।
आगामी लक्ष्य और प्रभाव:
- मिशन रफ्तार: पूर्व मध्य रेलवे के दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर वर्तमान गति 130 किमी/घंटा है, जिसे कवच की मदद से 160 किमी/घंटा तक ले जाने का कार्य प्रगति पर है।
- पश्चिम रेलवे का लक्ष्य: वडोदरा-नागदा खंड मार्च 2026 तक और विरार-मुंबई सेंट्रल खंड सितंबर 2026 तक कवच से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 364 इंजनों (Locomotives) में कवच लगाया जा चुका है।
- वैश्विक मानक: यह प्रणाली SIL-4 सुरक्षा मानकों का पालन करती है, जो दुनिया में सुरक्षा का उच्चतम स्तर है। इससे विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम हुई है और भारतीय सिग्नलिंग उद्योग को बढ़ावा मिला है।