भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर लोकसभा में सरकार ने अपना रक्षात्मक और आक्रामक दोनों रुख स्पष्ट कर दिया है। पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में ‘संवेदनशीलता’ शब्द पर जोर देते हुए कहा कि सरकार के लिए 140 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और जरूरतें सर्वोपरि हैं।
सरकार के मुख्य तर्क:
- संतुलित समझौता: डील दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति पैदा करती है।
- कृषि सुरक्षा: डेयरी और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, विपक्ष का डर निराधार है।
- MSME को लाभ: इस डील से छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खुलेंगे।
हालांकि, सदन का माहौल तर्कों से ज्यादा शोरगुल से भरा रहा। विपक्ष ने ‘नरेंद्र मोदी-सरेंडर मोदी’ के नारे लगाकर यह संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर सरकार को आसानी से घेरने वाले नहीं हैं। स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को मर्यादा में रहने की चेतावनी दी, लेकिन हंगामा नहीं थमा।
लोकसभा के बजट सत्र के छठे दिन भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस समझौते को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया। गोयल ने सदन को आश्वस्त किया कि यह डील ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है और इसमें डेयरी व कृषि क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार हैं और इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा के बाद से ही वार्ताकार दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर चर्चा कर रहे थे। गोयल ने कहा कि अन्य देशों की तुलना में अमेरिका ने भारत पर कम टैरिफ लगाया है, जो भारत की कूटनीतिक जीत है।
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर देश के हितों को बेचने का आरोप लगाया। निलंबित 8 सांसदों ने सदन के बाहर पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व आर्मी चीफ नरवणे और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरें थीं। सदन के भीतर राहुल गांधी को बोलने देने की मांग को लेकर भारी नारेबाजी हुई, जिसके कारण कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।