प्रधानमंत्री मोदी का राज्यसभा में संबोधन: विकसित भारत के संकल्प और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार

प्रधानमंत्री मोदी का राज्यसभा में संबोधन: विकसित भारत के संकल्प और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देते हुए ‘विकसित भारत’ के विजन को देश के सामने रखा। अपने विस्तृत संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का यह दूसरा पच्चीस साल का कालखंड (क्वार्टर) भारत के लिए उतना ही निर्णायक होगा, जितना आजादी की जंग के समय का दौर था।

प्रमुख बिंदु:

  • अर्थव्यवस्था की मजबूती: पीएम ने गर्व व्यक्त किया कि भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ (Fragile Five) से निकलकर आज दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने हाई ग्रोथ और लो इन्फ्लेशन (कम मुद्रास्फीति) के अनूठे संयोग को भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत बताया।
  • युवा शक्ति और टैलेंट: उन्होंने कहा कि जब दुनिया के समृद्ध देश बूढ़े हो रहे हैं, तब भारत युवा ऊर्जा से लबरेज है। भारत आज दुनिया का ‘टैलेंट पूल’ बन चुका है।
  • बैंकिंग और PSU रिफॉर्म्स: प्रधानमंत्री ने बैंकिंग सेक्टर के सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 से पहले ‘फोन बैंकिंग’ का दौर था, लेकिन आज बैंकों का NPA 1% से भी नीचे है। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के रिकॉर्ड मुनाफे की भी सराहना की।
  • विपक्ष पर प्रहार: पीएम ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में विजन और इच्छाशक्ति की कमी थी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में इंदिरा गांधी के एक पुराने भाषण का हवाला देते हुए कांग्रेस के ‘जीप और खच्चर’ वाले मॉडल की आलोचना की और इसकी तुलना आज के ‘नीति आयोग’ के प्रभावी कार्यबल से की।

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