नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की बहुचर्चित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर चल रहे विवादों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। रक्षा मंत्री ने उन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि सैन्य अधिकारियों पर रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने पर पाबंदी है।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पूर्व सेना प्रमुखों के किताब लिखने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत बताया, जिनमें यह कहा गया था कि सैन्य अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के 20 साल बाद तक किताब लिखने की अनुमति नहीं होती।
विवाद की पृष्ठभूमि: यह स्पष्टीकरण तब आया है जब संसद के बजट सत्र में राहुल गांधी समेत विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। जनरल नरवणे ने अपनी किताब में साल 2020 की गलवान झड़प और चीन के साथ हुए सीमा समझौतों के संवेदनशील पहलुओं का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनएसए अजीत डोवल और रक्षा मंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठकों और फोन कॉल का सिलसिलेवार विवरण दिया है।