नई दिल्ली: भारत के श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्टाफिंग फर्म ‘क्वेस कॉर्प’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में उपलब्ध कुल नौकरियों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी अकेले 40 प्रतिशत है, जबकि टियर-2 शहर 29 प्रतिशत रोजगार प्रदान कर रहे हैं। इसके विपरीत, दिल्ली-मुंबई जैसे टियर-1 महानगरों की हिस्सेदारी सिमटकर 31 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (BFSI) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर टियर-3 शहरों के वर्कफोर्स को 45 प्रतिशत से अधिक रोजगार दे रहे हैं। वहीं, रिटेल सेक्टर की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत है। औद्योगिक कॉरिडोर और बढ़ती खपत के कारण कोयंबटूर, इंदौर, सूरत, वडोदरा, नोएडा और लखनऊ जैसे शहर अब रोजगार के नए पावरहाउस बनकर उभरे हैं। क्वेस कॉर्प के सीईओ लोहित भाटिया ने बताया कि सेवाओं के विकेंद्रीकरण और रिटेल विस्तार ने नौकरियों को महानगरों से बाहर निकालकर छोटे शहरों तक पहुँचा दिया है।