देश के अलग-अलग हिस्सों में कुदरत के दो विपरीत रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी भारत में गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है।
- हिमालयी राज्यों का हाल: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और पंचाचूली की पहाड़ियों पर पिछले तीन दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है। सिक्किम में भारी हिमपात के कारण त्सोमगो झील के पास फंसे करीब 2,736 पर्यटकों को सेना और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षित निकाला है। हिमाचल प्रदेश में 27 फरवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने वाला है, जिससे चंबा, लाहौल-स्पीति और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर फिर से सफेद चादर बिछने के आसार हैं।
- मध्य भारत में बेमौसम मार: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ लाइन के कारण मौसम बिगड़ा हुआ है। एमपी के 20 से अधिक जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी ने गेहूं और चने की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। छत्तीसगढ़ के ओरछा और बचेली में 40 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है, और अगले 3 दिनों तक बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।
- मैदानी इलाकों में बढ़ती तपिश: राजस्थान और हरियाणा में फरवरी के महीने में ही अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। बाड़मेर में तापमान 36.3°C तक पहुंच गया है, वहीं हरियाणा के नूंह में पारा 31°C के पार है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राजस्थान में होली के आसपास भीषण ‘हीटवेव’ चल सकती है, जिससे तापमान 40°C तक जा सकता है।