नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग 2026’ के 11वें संस्करण के समापन दिवस पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और हिंद महासागर में इसकी केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की स्थिति केवल भौगोलिक रूप से बड़ी नहीं है, बल्कि भारत एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की क्षमता विभिन्न देशों को एक मंच पर लाने की है क्योंकि वैश्विक समुदाय भारत पर अधिक भरोसा करता है और उसके साथ सहज महसूस करता है।
मुख्य बिंदु:
- संस्थागत मजबूती: विदेश मंत्री ने गुरुग्राम स्थित फ्यूजन सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई देशों के प्रतिनिधियों का एक साथ काम करना भारत की समावेशी नीति का परिणाम है। उन्होंने IOR, कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन और बिम्सटेक जैसे मंचों को हिंद महासागर की आधारशिला बताया।
- सहयोग और प्रशिक्षण: भारत अपने पड़ोसी देशों जैसे सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका के साथ मिलकर नौसैनिक और तट रक्षक अभ्यास कर रहा है। इन देशों के पास भारतीय निर्मित जहाज हैं, जो गहरे रक्षा संबंधों को दर्शाते हैं।
- व्यावहारिक मदद: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन (HADR), तेल रिसाव (Oil Spill) नियंत्रण और ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई में भी अग्रणी है। उन्होंने श्रीलंका और मॉरीशस में हुए तेल रिसाव के दौरान भारतीय जहाजों द्वारा की गई त्वरित सहायता का भी जिक्र किया।