कृषि क्षेत्र में जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल बीमा योजना के नियमों में किए गए क्रांतिकारी सुधारों की घोषणा की है। लोकसभा में उन्होंने बताया कि अब बीमा राशि के भुगतान में देरी होने पर किसानों को नुकसान नहीं उठाना होगा। यदि 21 दिनों के भीतर बीमा क्लेम किसान के खाते में नहीं आता है, तो संबंधित बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना अनिवार्य होगा।
भ्रष्टाचार पर डिजिटल प्रहार: कृषि मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि ‘कृषि रक्षक पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों की सख्त निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि “भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है और अनियमितता पाए जाने पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं, जिससे बंदरबाँट की गुंजाइश खत्म हो गई है।
व्यक्तिगत नुकसान की भरपाई: अब नियमों में यह भी बदलाव किया गया है कि यदि किसी क्षेत्र विशेष के बजाय किसी एक व्यक्तिगत किसान की फसल भी खराब होती है, तो उसे मुआवजा मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।