पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमलों का सख्त विरोध किया है और इस तरह की घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शांति और विकास के दृष्टिकोण से न्यूक्लियर एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा हाल ही में स्मॉल हाइड्रो पावर डेवलपमेंट स्कीम को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 1500 मेगावाट नई जल विद्युत क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
कूटनीतिक प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संघर्ष की शुरुआत से ही भारत ने अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के संबंधित देशों के नेताओं से सीधे बातचीत की है और सभी से तनाव कम करने तथा संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नागरिकों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा डालने को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि भारत कूटनीतिक माध्यमों से इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत हमेशा मानवता और शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत का हर प्रयास तनाव कम करने और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में है, क्योंकि किसी भी प्रकार की हिंसा मानवता के हित में नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संकट के समय कुछ असामाजिक तत्व स्थिति का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए देश की सभी कानून-व्यवस्था एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।
सुरक्षा तैयारियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर जो कठिन परिस्थितियां बनी हैं, उनका असर लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे में देश को सतर्क और एकजुट रहने की आवश्यकता है।