प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में उभरते संकट को देखते हुए शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में मौजूदा हालात का व्यापक आकलन किया गया और देश की तैयारियों, सप्लाई चेन की मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए सुझावों की सराहना की और कहा कि इन सुझावों से बदलते हालात का प्रभावी ढंग से सामना करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सतर्कता, बेहतर तैयारी और केंद्र व राज्यों के बीच मजबूत तालमेल ही इस चुनौती से निपटने की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पहले भी कई वैश्विक संकटों का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय केंद्र और राज्यों ने “टीम इंडिया” की भावना से मिलकर काम किया, जिससे सप्लाई चेन, व्यापार और आम जनजीवन पर असर को काफी हद तक कम किया जा सका। उन्होंने कहा कि यही सामूहिक सहयोग आज भी देश की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए उस पर लगातार नजर बनाए रखना और रणनीतियों में लचीलापन रखना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 3 मार्च से एक इंटर-मिनिस्ट्रीयल ग्रुप रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहा है और समय-समय पर आवश्यक निर्णय ले रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, व्यापार को सुरक्षित रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों की रक्षा और उद्योगों को मजबूत करना शामिल है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकारी नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्यों के स्तर पर होता है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखें और जमाखोरी तथा मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय रखने, प्रशासन को अलर्ट मोड में रखने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
कृषि क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने अग्रिम योजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उर्वरकों के भंडारण और वितरण की नियमित निगरानी करने को कहा, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे समय में अफवाहें और गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, जिससे जनता में घबराहट पैदा हो सकती है। इसलिए सही और विश्वसनीय जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन ठगी और फर्जी एजेंटों से सतर्क रहने की सलाह भी दी।
प्रधानमंत्री ने सीमा और तटीय राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा, ताकि शिपिंग, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और समुद्री गतिविधियों से जुड़े संभावित खतरों का समय रहते सामना किया जा सके। उन्होंने उन राज्यों को भी निर्देश दिए जिनके नागरिक पश्चिम एशिया में हैं, कि वे हेल्पलाइन शुरू करें, नोडल अधिकारी नियुक्त करें और जिला स्तर पर सहायता प्रणाली विकसित करें, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर जानकारी और सहायता मिल सके।
दीर्घकालिक रणनीति के तहत प्रधानमंत्री ने बायोफ्यूल, सौर ऊर्जा, गोबरधन योजना, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और पाइप्ड नेचुरल गैस के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्यों का सहयोग आवश्यक है।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भाग लिया और कहा कि सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्रियों ने बैठक में विश्वास जताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति तंत्र पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कमी के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे आम जनता को राहत मिलेगी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्रियों ने इस बात की सराहना की कि केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर प्री-क्राइसिस स्तर के 70 प्रतिशत तक कर दिया है, जो पहले 50 प्रतिशत था। उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एक साझा चुनौती है और “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर काम करने से देश इस स्थिति से सफलतापूर्वक बाहर निकलेगा।