देश में एलपीजी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने सख्ती बढ़ाते हुए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। इसी क्रम में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ 350 से अधिक शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। शुक्रवार को सरकार ने जानकारी दी कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत 3,000 से ज्यादा छापेमारी की गई है और 1,500 से अधिक एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने देशभर में 1,500 से अधिक रिटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर अचानक निरीक्षण किए हैं। यह जानकारी पश्चिम एशिया के हालात को लेकर आयोजित अंतर-मंत्रालयी बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में सामने आई।
बयान के अनुसार, सरकार घरेलू एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके साथ ही अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इस उद्देश्य से रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया गया है, गैस बुकिंग के अंतराल में बदलाव किए गए हैं और आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर वितरित किया जा रहा है।
सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि वे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में सहयोग करें। साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आम लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा अफवाहों से दूर रहें।
सरकार ने लोगों को वैकल्पिक ईंधनों जैसे पीएनजी, इलेक्ट्रिक या इंडक्शन कुकटॉप के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया है और ऊर्जा की बचत करने की अपील की है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।
घरेलू मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों द्वारा एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले, मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।
इसके अलावा, सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया है, ताकि घरेलू स्तर पर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। साथ ही घरेलू रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्यात होने वाले पेट्रोल का 50 प्रतिशत और डीजल का 30 प्रतिशत घरेलू बाजार में उपलब्ध कराएं, जिससे देश में ईंधन की कमी की स्थिति न बने।